बीएमजी मॉल के पास रावण का पुतला बनाता कारीगर।
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रेवाड़ी। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा धूमधाम से मनाने के लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। वहीं रावण, कुंभकरण, मेघनाद के पुतले बनाने वाले परिवार भी पुतले बनाने के कार्य में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। शहर में करीब 50 से अधिक परिवार रावण बनाने का कार्य पिछले 15 दिन से कर रहे हैं। क्षेत्र में छह से लेकर 75 फीट तक के रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। पुतले बनाने वाले परिवारों का कहना है कि कोरोना काल के बाद महंगाई के कारण धंधा मंदा है। पुतले खरीदने वाले लोगों में जोश नहीं है। अधिकतर लोग बडे़ की बजाय छोटे पुतले खरीद रहे हैं। इससे दशानन के पुतले का कद छोटा हो गया है।
उनका कहना है 2000 से लेकर 55000 तक के रावण के पुतले रेवाड़ी में तैयार किए गए, लेकिन कुछ दुकानदारों के पास बुकिंग बाकी लगभग खाली बैठे हैं। किसी ने पुतले तैयार किए हैं, लेकिन कोई नजर नहीं डाल रहा है। चार साल पहले कई पुतले एक-एक परिवार के बिक जाते थे। इस बार पुतले तो काफी तैयार किए हैं, लेकिन खरीदार कम आ रहे हैं। पुतले तैयार कर रहे सतीश का कहना है कि उसके 15 पुतले बिक चुके हैं। इनमें से सबसे ऊंचा पुतला 75 फीट का है। इसकी कीमत 55 हजार रुपये है। यह राजस्थान के निमराणा में जाएगा। भिवानी, गुड़ियानी, रेवाड़ी शहर के विभिन्न हिस्सों में जाएंगे।
16 साल से कर रहे पुतले बनाने का काम
रामबाबू का कहना है कि वह 16 साल से पुतला बनाने का कार्य कर रहे हैं। इस बार 42 फीट का सबसे बड़ा पुतला तैयार किया है। छोटे पुतले तो बिक रहे हैं, लेकिन 42 फुट का पुतला नहीं बिका है। 15 से 25 फुट तक के पुतले बिके हैं।
पुतले की घटी मांग
गोपाल का कहना है कि रावण के पुतले तैयार किए ता रहे हैं, लेकिन अब तक एक भी पुतला नहीं बिका है। छोटे-छोटे पुतले भी रखे हैं। इस बार सोचा था कि कोरोना काल के बाद कुछ उछाल आएगा, लेकिन इस बार भी ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया।