संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। राजकीय विद्यालयों के परिसरों में पोषण वाटिकाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। पोषण वाटिकाओं में विद्यार्थी श्रमदान कर हरी सब्जियां उगाएंगे। इन सब्जियों का इस्तेमाल मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील)में किया जाएगा। इससे बच्चों को पोषक आहार मिलेगा और साथ ही उनका ज्ञान भी बढ़ेगा।
सभी राजकीय विद्यालयों के मुखिया को विद्यालय की खाली भूमि पर सब्जियां उगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। शिक्षकों के सहयोग से बच्चों की टोलियां बना कर पोषण वाटिकाएं तैयार की जाएंगीं। इसके लिए विद्यार्थियों को श्रमदान के लिए भी तैयार किया जाएगा। पोषण वाटिका में टमाटर, मूली, गाजर, साग, तोरई लगाई जाएगी और फुलवारी भी तैयार की जाएगी। कई स्कूलों में वाटिकाएं बननी शुरू भी हो चुकी हैं। एसएनजी (स्कूल न्यूट्रीशियन गार्डन) सभी सरकारी स्कूलों में स्थापित की जाएगी। जिन स्कूलों में जगह कम है, वहां स्कूल की छत पर गमले या पॉलीबैग में सब्जियां लगाई जाएंगी। इसमें विद्यार्थी सक्रिय रूप से शामिल होंगे। उन्हें स्वस्थ भोजन विकल्पों के बारे में जानकारी मिलेगी। स्कूल पोषण गार्डन की रिपोर्ट प्रति माह मुख्यालय के साथ साझा की जाएगी।
भोजन पकाने की प्रतियोगिता कराई जाएगी
शिक्षक वर्ष में दो बार छात्रों की ऊंचाई और वजन माप करेंगे। सभी छात्रों के बीएमआई की गणना की जाएगी। कम बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) वाले छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हें प्रोटीन के साथ अतिरिक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकते हैं। हर वर्ष सितंबर में राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान खाना पकाने की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
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वर्जन
सभी राजकीय विद्यालयों के मुखिया को पत्र भेजकर विद्यालय परिसर में पोषण वाटिकाएं लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन वाटिकाओं का समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा
।- कपिल पूनिया, डीईओ, शिक्षा विभाग रेवाड़ी।