रेवाड़ी। महेंद्रगढ़ के गांव उन्हाणी में हुए स्कूल बस हादसे के बाद से सभी अभिभावक बच्चों को बस से स्कूल भेजने के लिए चिंतित है। चिंता इस बात की है कि बच्चे बस से सुरक्षित स्कूल पहुंच पाएंगे या नहीं। लगातार निजी स्कूलों के खिलाफ विरोध के स्वर प्रखर होते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार की तरफ से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए नियम नहीं बनाए गए हैं। नियम 2017 में ही बना दिए गए थे। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने आदेश भी जारी कर दिए थे। इसके बावजूद जिले के अधिकारी नियम को लागू ही नहीं कर पाए।
अमर उजाला की टीम ने जब पड़ताल की तो मालूम चला है कि बस से आने-जाने के लिए छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए 2017 में ही हरियाणा सरकार की ओर से पॉलिसी बना दी गई थी। इसके तहत जिला स्तरीय समिति गठित की गई थी। इसके तहत उपायुक्त की अध्यक्षता के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक, आरटीए, महाप्रबंधक हरियाणा रोडवेज तथा जिला शिक्षा अधिकारी को सम्मिलित किया गया था।
यह समिति समय-समय पर बसों की सुरक्षा को लेकर जांच करने के लिए गठित की गई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इस कमेटी ने आज तक एकजुट होकर कार्य ही नहीं किया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब अधिकारी ही अपना कर्तव्य नहीं निभा रहे हैं तो प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को कौन रोकेगा। हालांकि अब हादसा होने के बाद पूरे हरियाणा में अधिकारी नींद से जाग गए हैं।
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अधिकारी नियमों को लागू नहीं करेंगे तो, उन पर भी कार्रवाई का है प्रावधान
डायरेक्टर शिक्षा निदेशालय की ओर से बनी पॉलिसी में स्पष्ट किया गया था कि यदि कोई अधिकारी नियमों का पालन नहीं करता है और यदि नियमों का पालन करने में कोई भी स्कूल अनदेखी करता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने सहित उसे टेकओवर करने तक के अधिकार दिए गए थे। इतना ही नहीं पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हरियाणा राज्य बच्चों के अधिकार आयोग की ओर से 2019 में बस के लिए 21 नियम एवं शर्तें बताई गई थीं।
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बस की सुरक्षा के लिए बनाए थे 33 नियम
पॉलिसी के तहत 23 पेजों में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए गए थे। इसमें केवल बस की सुरक्षा के लिए ही 33 नियम बनाए गए। इनकाे पूरा किया जाना किसी भी स्कूल संचालक के लिए अनिवार्य है।
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यह बनाए गए थे जरूरी नियम
बस का रंग पीला होना चाहिए। वाहन पर स्कूल बस लिखा होना चाहिए। यह बस किस रूट पर चलाई जा रही है उसका रूट डिस्प्ले होना चाहिए। बस में किसी भी प्रकार की डार्क फिल्म या पर्दे नहीं लगे होने चाहिए। बस के चलने के लिए वैध फिटनेस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन तथा इंश्योरेंस होना आवश्यक है। बस की खिड़की पर होरिजेंटल लोहे की ग्रिल लगी होनी चाहिए। फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, बस की स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जितनी सीट है उतने बच्चों बैठने चाहिए।
वर्जन
शनिवार को विद्यार्थियों के लिए घर से स्कूल तक सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए आयोजित बैठक में 15 स्कूल परिवहन सुरक्षा निरीक्षण टीम का गठन किया गया। इसमें जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। टीम में विद्यालयों के प्राचार्य, नायब तहसीलदार, पुलिस कर्मचारी और लिपिक-डाटा एंट्री ऑपरेटर को शामिल किया गया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन गंभीर है।-विकास यादव, एसडीएम, रेवाड़ी