रेवाड़ी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने जिले के सभी 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण को सौंप दी है। एसटीपी के निरीक्षण के दौरान एकत्रित किए गए नमूनों के विश्लेषण के आधार पर एसटीपी निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं।
सीपीसीबी द्वारा हाल ही में एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट में कई खुलासे भी हुए थे। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सभी एसटीपी चालू पाए गए, जबकि कालूवास में एसटीपी का उन्नयन किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है बावल में एसटीपी अपने उपचारित पानी को हरियाणा और राजस्थान सीमा के पास पावटी में ग्राम पंचायत की भूमि में छोड़ता है और शेष पांच एसटीपी अपने उपचारित पानी को साहबी बैराज में छोड़ते हैं।
केवल धारूहेड़ा और खरखड़ा के एसटीपी में कीटाणुशोधन सुविधाएं हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जिले के खरखड़ा, धारूहेड़ा, नसियाजी रोड, कालूवास गांव और बावल कस्बे में इन एसटीपी का संचालन किया जा रहा है।
बता दें कि जब पहले सुनवाई हुई थी तब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से रेवाड़ी के 6 एसटीपी प्लांट की रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सीपीसीबी पर कड़ा रुख अपनाकर सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि पर्यावरणीय मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तीन सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी थी कि अगर रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं की गई तो सीपीसीबी के सदस्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। सीपीसीबी की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत न करने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की भी बात कही गई थी। आज मामले की सुनवाई होगी।
गांवों में घुल रहा है जहर
याचिकाकर्ता गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने बताया कि साहबी बैराज में एसटीपी प्लाटों की तरफ से वर्षों से छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी की वजह से आसपास के दर्जनों गांवों का भूमिगत जलस्तर ओर पीने का पानी भी अपनी गुणवत्ता खो चुका है। कहा कि जुलाई में जिले के डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना गांवों में पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सभी क्षेत्र साहबी बैराज के आसपास के लगते हैं।
गांवों के लोग अनजाने में सालों से प्रदूषित पानी पी रहे
प्रकाश यादव के मुताबिक इन गांवों के लोग अनजाने में सालों से इस प्रदूषित पानी का सेवन कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस दूषित पानी का सेवन करने से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उच्च टीडीएस और मैग्नीशियम का स्तर किडनी और लीवर को प्रभावित कर सकता है, जिससे किडनी स्टोन, लीवर की बीमारियां, और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मैग्नीशियम और लौह की अधिकता से हृदय संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप और हृदय रोग प्रमुख हैं। फ्लोराइड की अधिक मात्रा दांतों और हड्डियों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है, जिसमें दांतों का क्षय, दांतों का झड़ना, और हड्डियों की कमजोरी शामिल है। लौह की अधिकता से त्वचा में खुजली, दाने, लालिमा और बालों का झड़ना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
एनजीटी ने इन एसटीपी की जांच के दिए थे निर्देश
खरखड़ा:: 9.5 एमएलडी एसटीपी:: पीएचईडी
धारूहेड़ा :: 5 एमएलडी एसटीपी:: एचएसवीपी
नासियाजी रोड ::16 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
नासियाजी रोड :: 8 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
कालूवास ::: 6.5 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
बावल ::: 3.5 एमएलडी एसटीपी:: पीएचईडी