रेवाड़ी। प्रॉपर्टी आईडी के सर्वे का काम कर चुकी एक प्राइवेट कंपनी की लापरवाही का खामियाजा अब भूस्वामी भुगत रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कंपनी ने गैर जिम्मेदाराना तरीके से सर्वे का काम किया और प्रॉपर्टी आईडी बना डाली। प्रॉपर्टी आईडी सर्वे में किसी का टैक्स किसी और के खाते में जोड़ दिया। अब समस्या को दूर करने को लेकर नगर परिषद के कर्मचारी परेशान हैं। हालांकि दूसरी ओर एनडीसी की कामयाबी पर परिषद राशि वसूली में वृद्धि का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सर्वे कंपनी की गलतियों को ठीक करने में नगर परिषद नाकाम रही है।
नियमों के अनुसार बनने वाले प्रॉपर्टी टैक्स के मुकाबले दस गुणा राशि संपत्ति मालिकों के नाम चढ़ गई और उन्हें डिफाल्टर बना दिया गया है और संपत्ति मालिक अब ऑनलाइन रिकार्ड दुरुस्त करवाने के लिए हाउस टैक्स ब्रांच के कर्मचारी से लेकर जिला नगर आयुक्त के चक्कर काट रहे हैं।लोगों ने बताया कि कई माह त्रुटियां ठीक करने के बावजूद पोर्टल लॉन्चिंग के बाद हालात ये रहे कि पड़ोसी की संपत्ति का मालिक दूसरे को बना दिया गया है तो किसी का टैक्स किसी अन्य के खाते में जोड़ दिया गया है। यहां तक कि कम क्षेत्र का लाखों रुपये का टैक्स ऑनलाइन पेंडिंग कर दिया गया है। अब त्रुटियों ठीक करने के लिए सर्वे कंपनी का कोई कर्मचारी तैनात नहीं है और नगर परिषद के कर्मचारी खुद इस प्रक्रिया में फंसे दिखाई दे रहे हैं। बतादें कि सरकार की ओर से संपत्ति कर को ऑनलाइन करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया था। सर्वे के दौरान बिना संपत्ति मालिक से संपर्क किए रिकार्ड की एंट्री कर दी गई। नगर परिषद के तहत करीब 65 हजार संपत्तियों को ऑनलाइन किया गया है जिसमें घर, मकान, संस्थान और औद्योगिक इकाइयां हैं। संवाद
समझ से परे है ऑनलाइन और ऑफलाइन
शहर के लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन के झमेले में पड़े हैं और कार्यालय की कार्यप्रणाली लोगों की समझ से परे है। क्योंकि जब शहरवासियों को अपने नाम, मोबाइल फोन नंबर, क्षेत्रफल ठीक करवाना होता है तो वे अर्जी लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचते हैं। यहां कर्मचारी उन्हें ऑनलाइन आवेदन करने की बात कहते हैं जबकि अधिकतर शहरवासी इस प्रक्रिया से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। उनकी समस्या का समाधान नहीं होने से लोग इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं। दूसरी तरफ संपत्ति कर ब्रांच के कर्मचारी लोगों को एक साथ ही सभी जानकारी नहीं देते हैं। न ही उन्हें दस्तावेजों के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
लोगों को काटने पड़ रहे कार्यालय के चक्कर
अगर ऑनलाइन प्रॉपर्टी टैक्स के फायदे की बात की जाए तो कोरोना के दौरान प्रदेश भर में रजिस्ट्रियों में फर्जीवाड़ा होने के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर संपत्ति का नगर परिषद से नोड्यूज सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया था। लेकिन अब तहसील में रजिस्ट्रेशन के समय कालम अधूरा रहने के कारण लोग नगर परिषद के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। कई दिन तक दोनों पार्टियों को रजिस्ट्री के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
वर्जन
विभाग के कर्मचारी ऑनलाइन संपत्ति कर की प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं। अधिकतर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। अलग से डेस्क और स्थापित किए जाने हैं जिसके लिए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। कार्यालय में किसी शहरवासी को परेशानी नहीं होने दी जा रही है।-मनोज यादव, ईओ