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Rewari News: सोलहराही का तालाब प्राचीन जलाशयों में शामिल

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नैना
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सोलहराही तालाब रेवाड़ी के प्राचीन जलाशयों में शामिल है। इसका निर्माण करीब 1650 ईस्वी में राव गुजर मल ने कराया था। पहले इसे सोलहराही शिव सरोवर कहा जाता था, क्योंकि तालाब में 16 घाट बने हुए थे। तालाब के ऊपर प्राचीन शिव, शनि और गणेश मंदिर स्थित हैं। करीब 75 मीटर वर्गाकार तालाब में पश्चिम दिशा में पांच सीढ़ियां और उत्तर की ओर ढलानदार रास्ता बनाया गया है। उत्तर व पूर्व दिशा में बने मंडप लोगों के विश्राम के लिए उपयोग होते थे। उत्तर दिशा में दो कुएं भी हैं, जिनका निर्माण 1888 में गंगा राम सिंह और रूद्र सिंह ने कराया था। यहां से लोगों को पीने का पानी मिलता था। किशन सहाय द्वारा 1888 में बनवाई गई बारादरी पर देवनागरी में शिलालेख भी मौजूद हैं। तालाब में पहले नहर के माध्यम से पानी पहुंचता था, जिसके अवशेष आज भी दिखाई देते हैं। यह ऐतिहासिक तालाब आज भी वर्षा जल संचयन के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।
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नैना, कक्षा छठी, अरावली हिल्स पब्लिक स्कूल टांकड़ी(रेवाड़ी)

नैना

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