रेवाड़ी। शहर के नाई वाली चौक पर स्थित 40 दुकानों का मामला एक बार फिर गर्मा गया है। दरअसल, दुकानें खाली कराने के लिए मार्केट कमेटी की तरफ से लगाई याचिका तत्कालीन एसडीएम ने गलत किरायेदारों को पक्षकार बनाए जाने की बात कहकर खारिज कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ मार्केट कमेटी ने गुरुग्राम कमिश्नर के समक्ष अपील दायर की थी।
इस अपील पर निर्णय सुनाते हुए कमिश्नर ने एसडीएम कोर्ट को दोबारा से मामले में सुनवाई करने और पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में इस मामले की सुनवाई दोबारा से एसडीएम कोर्ट ही करेगी। दोनों पक्षों को 2 मई को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। इसमें दोनों ही पक्ष मौजूद रहेंगे।
क्या है पूरा मामला
शहर के मुख्य चौक नाई वाली के समीप ग्रोवर रेस्ट हाउस मार्केट कमेटी की काफी पुरानी जायदाद है। इसके अंदर करीब 40 दुकान मार्केट कमेटी ने किराए पर दी हुई है। यह दुकानें साल 1975 से किराएदारों के पास है, लेकिन इस बिल्डिंग को बने हुए काफी लंबा समय हो चुका है। इस कारण कमेटी के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने सर्वे के दौरान 5 जून 2015 को इस पूरी बिल्डिंग को ही खंडहर घोषित किया था। इसे कंडम घोषित करते हुए व्यापार के लिए उपयुक्त नहीं माना था। इसके बाद मार्केट कमेटी ने 13 अप्रैल 2016 को और 28 जून 2016 को अपने अधिवक्ता से कानूनी नोटिस देकर इन दुकानों को खाली करने के लिए कहा था, लेकिन व्यापारियों ने कब्जा खाली नहीं किया। इस पर मार्केट कमेटी ने पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट के तहत इन दुकानों को खाली करने के लिए 10 मार्च 2017 को एसडीएम कोर्ट रेवाड़ी में याचिका दायर की थी।
एसडीएम कोर्ट ने खामियों का किया था जिक्र
एसडीएम कोर्ट ने 30 अगस्त 2018 को आदेश दिए थे कि याचिका में तकनीकी खामियां हैं। इसमें इकरारनामा के अनुसार सही दुकान कब्जाधारी के नाम नहीं बताए गए हैं। इसलिए इसे दोबारा से दायर किया जाए। इस आदेश के खिलाफ मार्केट कमेटी ने गुरुग्राम कमिश्नर की अदालत में अपील दायर की थी। इतना ही नहीं अपील में कहा गया था की दुकान में बैठे किराएदारों ने किराएदारी बिना किसी विभाग की अनुमति के बदल दी है। कई किराएदारों की मौत होने के बाद उनके बच्चे काम कर रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में उन्होंने अपने नाम दर्ज नहीं करवाए हैं। अपील पर अपना निर्णय सुनाते हुए कमिश्नर ने आदेश दिए हैं कि इस पूरे मामले की सुनवाई, जो याचिका में पक्षकार बनाए गए हैं, उन्हीं के अनुसार और धारा 4 के तहत नोटिस देकर एसडीएम कोर्ट को ही कार्रवाई करनी होगी।
क्या कहना है दुकानदारों का
प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि विभाग ने अपनी मर्जी से ही इसे खंडहर घोषित किया है, जबकि इसमें कारोबार किया जा सकता है। इसके अलावा विभाग ने स्वयं ही किराया लेना बंद कर दिया है, जबकि वह किराया देने को तैयार हैं।