बावल। ज्येष्ठ पूर्णिमा एवं कबीर जयंती पर जयगुरुदेव नगर कसौला चौक स्थित आश्रम में सत्संग कार्यक्रम में बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि संत समाज को जागरूक करते हैं। संत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जो आत्मिक रूप से उच्च अवस्था प्राप्त कर परम सत्य तक पहुंचते हैं, उन्हें संत कहा जाता है। उनके अनुसार संत समाज को जागरूक करने और सही आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों और पुस्तकों का अध्ययन मात्र पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव के लिए व्यावहारिक साधना और मार्गदर्शन आवश्यक है, जिसके लिए गुरु की आवश्यकता बताई गई है।