रेवाड़ी। बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार से रविवार को रेवाड़ी में नवाजे गए चारों साहित्यकारों ने कहा कि साहित्य ही हिंदी और हरियाणवी संस्कृति को बचाने का एक माध्यम है। साहित्यकार अपनी संस्कृति और इतिहास को कृतियों के माध्यम से समाज के सामने लाने का प्रयास करता है। जिले के गांव गुड़ियानी में जन्मे साहित्यकार एवं पत्रकार बाबू बालमुकुंद गुप्त की 115वीं पुण्यतिथि पर मॉडल टाउन स्थित हिंदू स्कूल में बाबू बालमुकुंद गुप्त स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। डॉ. जयभगवान शर्मा (झज्जर), दलबीर फूल (रेवाड़ी), डॉ. कमलेश मलिक (सोनीपत) और डॉ. कृष्णलता यादव (गुरुग्राम) को बाबू बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार से नवाजा गया
हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला और बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद्, रेवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में प्रदेशभर के साहित्यकारों ने भाग लिया। कोसली के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव मुख्य अतिथि रहे। अकादमी के निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चंद्र त्रिखा ने अध्यक्षता की। समारोह में गुप्त के प्रपौत्र बिमल गुप्त (कोलकाता) ने स्वागताध्यक्ष की भूमिका निभाई।
डॉ. जयभगवान शर्मा हरियाणवी बोली के उत्कृष्ट लेखक के लिए सम्मानित
झज्जर निवासी पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी व साहित्यकार डॉ. जयभगवान शर्मा ने बताया कि उन्हें 2016 में पर्यावरण पर प्रकाशित पुस्तक स्वच्छता और हम और 2020 में हरियाणवी बोली में प्रकाशित हुई यादां का झरोखा पुस्तक के लिए सम्मानित किया गया है। शर्मा को हरियाणवी बोली के उत्कृष्ट लेखक के लिए बाबू बालमुकुंद सम्मान 2022 से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि फरवरी 2020 में उन्हें संस्कृत साहित्य अकादमी, पंचकूला की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महर्षि वेद व्यास सम्मान से सम्मानित किया था। उन्हें चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। 35 पुस्तकें प्रकाशित कर चुके हैं। भारत सकार की दो डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में भी उन्होंने एक लेखक के रूप में काम किया है।
सात पुस्तकें लिख चुकें हैं दलबीर फूल
रेवाड़ी के लिसान निवासी साहित्यकार दलबीर फूल ने बताया कि उन्होंने सात पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिनमें आठोना की हवा चालेगी, ताऊ बुद्धा हरियाणवी हास्य कहानियां, श्रीनारायण जी, लोक संस्कृति के साधक, शांत सरोवर, झंकार भी और तंकार भी, मेरा गांव बिसोहा (चंपू संग्रह) व विधुर न्यू बोल्या आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आज के समारोह में दो हिंदी रचनाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 29 मई 2022 को काठमांडू में एक आयोजित समारोह में सम्मानित किया गया था।
डॉ. कमलेश मलिक को मुख्यमंत्री कर चुके सम्मानित
सोनीपत निवासी रचनाकार डॉ. कमलेश मलिक ने बताया कि उन्हें आज के समारोह में दो कहानी संग्रह 2009 में प्रकाशित हुई सिर्फ आने लिए व 2018 में प्रकाशित हुई एक मोर्चा और के लिए सम्मानित किया गया है। उन्हें 24 फरवरी 2022 में हरियाणा साहित्य परिषद की ओर से आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान से सम्मानित किया गया था।
डॉ. कृष्णलता यादव 15 पुस्तकें लिख चुकीं
गुरुग्राम निवासी रचनाकार डॉ. कृष्णलता यादव ने बताया कि उन्होंने अब तक 15 पुस्तकें लिखी हैं। जिसको देखते हुए उन्हें समारोह में सम्मानित किया गया है। इसके अलावा बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद्, रेवाड़ी की ओर से भी उन्हें बाबू बालमुकुंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं।