संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले की तीन विधानसभा सीटों रेवाड़ी, बावल और कोसली में भाजपा की जीत से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की न सिर्फ साख बढ़ी है बल्कि उनका कद और बढ़ गया है। रेवाड़ी सीट पर लक्ष्मण यादव को छोड़ दिया जाए तो कोसली में अनिल यादव और बावल कृष्ण कुमार पहली बार चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज कराई।
तीनों सीटों पर भाजपा की सीट से राव इंद्रजीत की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई थी। जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की जीत को लेकर राव इंद्रजीत उत्साहित हैं। कोसली और बावल में भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाई है। 2014 से भाजपा लगातार कोसली और बावल विधानसभा सीट से जीतती आ रही है। इस बार भी बड़े अंतर से प्रतिद्वंद्वी को हराया है। कोसली से लक्ष्मण सिंह यादव विधायक 2019 में चुने गए थे, इस बार रेवाड़ी सीट से वह चुनाव लड़ रहे थे और उन्होंने जीत हासिल की है। कोसली से अनिल यादव और बावल से डॉ कृष्ण कुमार दोनों नए प्रत्याशी थे जिन्हों जीत दर्ज कराई। दोनों प्रत्याशियों ने इससे पहले कभी भी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। वहीं कोसली और बावल में कांग्रेस ने जिन दो प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था, दोनों ही पूर्व में मंत्री रह चुके हैं और राजनीति में दो दशक से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। दोनों पूर्व मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है। बावल और कोसली से कांग्रेस लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव हारी है।
राव इंद्रजीत सिंह ने जनता का जताया आभार, दी बधाई
भाजपा के तीनों प्रत्याशियों की जीत के बाद राव इंद्रजीत सिंह ने राहत की सांस ली है। इस बार उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई थी। तीनों ही प्रत्याशी राव के पसंद के थे। यह जीत उनके लिए काफी मायने भी रखती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा कोसली और बावल से तो जीत गई थी, लेकिन रेवाड़ी विधानसभा से हार गई थी। रेवाड़ी सीट को दक्षिण हरियाणा का गढ़ माना जाता है। क्योंकि राव इंद्रजीत सिंह का निवास स्थान रेवाड़ी विधानसभा में स्थित है।
बावल में 33 वर्ष से नहीं आई कांग्रेस
जिले की एकमात्र आरक्षित सीट बावल में कांग्रेस 33 वर्ष से नहीं आई है। भाजपा ने इस बार हैट्रिक मारी है। 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. बनवारी लाल ने जीत हासिल की थी। डॉ. बनवारी लाल जनस्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं। इस बार भाजपा ने डॉक्टर कृष्ण कुमार को टिकट दिया था जिन्हें राजनीति का अनुभव नहीं है। ऐसे में भाजपा के इस फैसले से जहां हर कोई हैरान था तो बनवारी लाल को भी टिकट कटने पर यकीन नहीं हो रहा था। जिले में केवल बावल ही ऐसी सीट थी, जहां पर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों का पार्टी के नेताओं ने विरोध नहीं किया। 1967-1991 तक सबसे अधिक कांग्रेस 3 बार (1972, 1982 व 1991 में जीती है। भाजपा 2014 व 2019 में और इनेलो 2000 व 2009 में दो बार विजेता रही। 1967 व 2005 में निर्दलीय प्रत्याशी जीते। बाकी दल एक-एक बार यहां की विधायकी संभाल चुके हैं।