फोटो: रामलीलारेवाड़ी। श्री राम मंदिर में रामलीला का हो रहा मंचन। संवाद
रेवाड़ी। रेलवे कालोनी में श्री राम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से रामलीला मंचन में बुधवार को पं. मोहन लाल शर्मा के मंत्रोच्चारण और पूजन के बाद रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने रामलीला का उद्घाटन किया। मंचन के दौरान रावण विभीषण को लंका से निकालता है, क्योंकि उसको यह पसं नहीं आता है कि सीता को प्रभु राम को लौटा दिया जाए।
विभीषण प्रभुराम के चरणों में पहुंचता है। राम विभीषण को लंका का राजा घोषित कर देते हैं। राम जी नील की सहायता से समुद्र पर पुल का निर्माण कराते हैं। नील को श्राप दिया गया था कि जो भी पत्थर पानी में डालेंगे वो तैरता रहेगा, क्योंकि वह ऋषि लोगों की मूर्तियां उठा कर समुद्र में डाल देते थे, जिससे सारी सेना समुद्र पार करती है। अंगद को दूत के रूप में रावण को समझाने भेजा जाता है।
रावण को जब समाचार मिलता है कि राम दल समुद्र पार गया तो सभा में युद्ध की रणनीति पर विचार होता है। रावण को दूत से समाचार मिलता है कि राम दल से अंगद दूत के रूप में आया है। अंगद व रावण के बीच संवाद होता है लेकिन अंगद की बातों का रावण पर कोई असर नहीं होता हैं। अंगद अपनी शक्ति प्रदर्शन करते हैं और पृथ्वी पर पैर जमाते हुए कहते हैं कि कोई भी बलवान मेरे पैर को उठा कर दिखाए। कोई भी उनके पैर को नहीं हिला पाता है। अंत में अंगद युद्ध का ऐलान कर के आ जाता है।
पूरा पर्वत उठाकर लाते हैं हनुमान
लक्ष्मण जी हनुमान सहित मेघनाथ से युद्ध करने के लिए जाते हैं, लेकिन मेघनाथ द्वारा लक्ष्मण जी को शक्ति बाण से मूर्छित कर देता है। उन के इलाज हेतु लंका के वैध को लाया जाता है जो द्रोणाचल पर्वत से संजीवनी बूटी प्रातः होने से पहले लाने को कहते हैं। इस कार्य के लिए हनुमान जी को भेजा जाता है लेकिन डंकिनी उन के रास्ते में बाधा डालती है, मगर वह बाधा को पार कर देते हैं। हनुमान जी पर्वत पर बूटी को न पहचानने के कारण पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं। रास्ते में भरत कोई राक्षस समझ कर हनुमान को बिना घसी के बाण से नीचे गिरा देते हैं। जब हनुमान जी चेत में आते हैं तो सारा वृत्तान्त भरत को सुनाते हैं तो वह बहुत दुखी होते हैं और शीघ्र जाने को कहते हैं। हनुमान जी अकाश मार्ग से लंका में पहुंचते हैं तो सब के चेहरे पर खुशी की लहर आ जाती है। इस दृश्य को देख कर दर्शकों ने खूब आनन्द उठाया। वैध बूटी को पहचान कर लक्ष्मण जी के रोग का उपचार करते हैं जिस से उन को चेतना आ जाती है।