संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। मसानी साहबी बैराज में हर रोज लाखों लीटर दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कोर्ट के सख्त आदेश पर जिला प्रशासन की ओर से एडीसी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय कमेटी जांच के लिए आसपाल के ट्यूबवेलों के पानी के सेपल लेने पहुंची। यहां उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि इन ट्यूबवेलों का पानी ठीक आए, इसको लेकर जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी रात को केमिकल से भरी टंकी लगा गए। जिससे सभी ट्यूबवेलों के पानी की रिपोर्ट ठीक आए। दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित मसानी सहाबी बैराज में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी को लेकर एनजीटी कोर्ट के सख्त रुख के चलते शनिवार को एडीसी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शिकायतकर्ता प्रकाश खरखड़ा की मौजूदगी में आसपास के कई गांवों के ट्यूबवेल के सैंपल लिए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने जॉइंट कमेटी द्वारा इन ट्यूबवेलों के पानी के सैंपल लिए आने से पहले रात को पानी को स्वच्छ दिखाने के लिए एक केमिकल की टंकी लगा दी, जिससे उनकी रिपोर्ट ठीक आए। जब एडीसी को इस बात का पता लगा तो उन्होंने गांव के हैंडपंपों के पानी के सैंपल लेने के निर्देश दिए। एनजीटी के आदेश पर साहबी के आसपास स्थित गांवों के लोगों को जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा ट्यूबवेल से पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है। सीवरेज व पानी की व्यवस्था को लेकर पंचायत के पास इसका जिम्मा होता है।
इन गांवों से लिए सैंपल
जिन गांवों से सैंपल लिए उनमें मसानी, तितरपुर, खलियावास, रसगण, निखरी, भटसाना, ततारपुर खालसा, अलावलपुर व खरखड़ा आदि गांव शामिल हैं।