रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में इंश्योरेंस कंपनी को 30 लाख रुपये दिए जाने के आदेश दिए हैं। यह राशि शिकायतकर्ता को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ 45 दिन के अंदर अदा करनी होगी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और वाद खर्चे के लिए 11 हजार रुपये अलग से देने होंगे।
गांव खलीलपुर निवासी उषा देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग में एक शिकायत दायर कर मांग की थी कि बीमा कंपनी पति की मृत्यु के बाद बीमा राशि नहीं दे रही है। शिकायत में बताया गया था कि पति तेजपाल भारतीय सेना में लांस नायक के पद पर कार्यरत थे, लेकिन वॉशरूम में गिरने के पश्चात उनकी 2 जनवरी 2020 को मृत्यु हो गई थी। जबकि मृत्यु के पूर्व आर्मी अस्पताल में उनका उपचार भी किया गया था। आर्मी में डीएसपी स्तर पर इनकम के आधार पर सामूहिक बीमा पॉलिसी यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी के द्वारा दी गई थी। यह बीमा राशि मृत्यु के पश्चात शिकायतकर्ता की पत्नी उषा देवी को बतौर नॉमिनी होने के कारण दी जानी थी, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी ने यह राशि देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि मेडिकल ट्रीटमेंट के दौरान उसकी मृत्यु लीवर की खराबी के कारण तथा अत्यधिक अल्कोहल लेने के कारण हुई प्रतीत होती है। इसलिए बीमा पॉलिसी के तहत उसे इंश्योरेंस की राशि नहीं दी जा सकती। इसके बाद कई बार शिकायतकर्ता की ओर से आर्मी के उच्च अधिकारियों सहित इंश्योरेंस कंपनी व बैंक से पत्राचार किया गया , लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
जिला उपभोक्ता आयोग में 19 जनवरी 2023 को शिकायत पत्र दायर कर इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा व बीमा राशि दिए जाने की मांग की। उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि पेश किए गए दस्तावेजों से यह साबित होता है कि मृत्यु का कारण सेप्टिक शॉक था। जो की मृतक को गंभीर चोट गिरने से लगी थी। जिस कारण नाक में फ्रैक्चर हो गया था। अत्यधिक रक्त बह गया था। पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा और सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने कहा है कि शिकायतकर्ता कंपनी से बीमा राशि लेने की हकदार है।