रेवाड़ी। जून से वर्षा ऋतु की शुरुआत हो जाएगी। इससे पहले ही नाहड़ क्षेत्र को हरा-भरा बनाने का लक्ष्य वन विभाग ने रखा है। दरअसल, वन विभाग नाहड़ की ओर से नाहड़, बेरली व गुड़ियानी नर्सरियों में कई प्रजातियों के 1 लाख 32 हजार 300 से अधिक पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें विभाग द्वारा जून से पहले ही नहरों के आस-पास, सरकारी संस्थानों व पंचायत भूमियों में लगाए जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, इन्हें कई योजनाओं के तहत वितरित किया जाएगा, ताकि जरूरत के हिसाब से सभी क्षेत्रों में पौधरोपण हो सके। अधिकारियों ने बताया कि इस बार विभाग के निर्देशानुसार 1 लाख 32 हजार 300 विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें वर्षा ऋतु से पहले ही रोपित कर दिया जाएगा, क्योंकि बारिश से पौधे अच्छी तरह अंकुरित करते हैं।
इनमें नीम, कजलिया, गुलाबी तून, शीशम, अमरूद, नींबू, चकरेशिया, पापड़ी, एलिस्टोनिया, अर्जुन बकान, बहेड़ा आम, कदम, कट, सागवान, गुलमोहर, कचनार, केसिया, गलूका, आंवला, बेलपत्र, जकरण्डा, सीरस, अमलतास आदि पौधे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 57 हजार 300 पौधे नहर रोड, सरकारी संस्थान, पंचायत भूमि आदि पर लगाए जाएंगे। इसके साथ पौधगिरी स्कीम के अंतर्गत 15 हजार पौधे लगाए जाएंगे। जल शक्ति अभियान के तहत 13 हजार पौधे पंचायत तथा फ्री स्कीम के तहत 32 हजार पौधे आम आदमी, सरकारी संस्थान व पंचायत आदि को दिए जाएंगे। ईश्वर सिंह वन दरोगा, सुरेश सैन वनरक्षक व योगेश कुमार ने बताया कि सभी सीजन में एक पौधा अवश्य रोपित करें, ताकि वन का संरक्षण किया जा सके।
वन कर्मियों के सामने बंदर बने चुनौती
वन कर्मचारी पौधे तैयार करने का काम कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने बंदर भी चुनौती बन रहे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि बंदर आते हैं और मेहनत पर पानी फेरकर चले जाते हैं, यानी जिन पौधों को तैयार किया जाता है उसको मिट्टी में मिलाकर चले जाते हैं। वे झुंड के साथ नर्सरी में आते हैं, इसलिए उनको वहां से भगाना भी कर्मचारियों के लिए मुश्किल है। पौधों के साथ बंदरों द्वारा छेड़छाड़ करने के बाद फिर वह पौधा किसी काम का नहीं बचता, इसलिए बंदरों से कर्मचारियों को परेशानी आ रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को यहां से दूर भगाया जाए, ताकि परेशानी न हो।
जल्द काम पूरा करने का लक्ष्य: वन अधिकारी
विभाग की ओर से पौधे तैयार करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। वर्षा ऋतु से पहले ही काम पूरा कर लिया जाएगा और उससे पहले ही पौधों का वितरण कर उन्हें रोपित भी कर दिया जाएगा, ताकि बारिश होने पर वे पौधे अच्छी तरह अंकुरित कर सकें। नाहड़, बेरली व गुड़ियानी नर्सरियों में कई प्रजातियों के 1 लाख 32 हजार 300 से अधिक पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे नाहड़ क्षेत्र को हरा-भरा बनाया जा सके, ताकि वन का संरक्षण किया जा सके।
- अभय सिंह यादव, रेंज अधिकारी, वन विभाग नाहड़।