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Rewari News: रेवाड़ी-दादरी खंड पर एक किमी की टनल तैयार

Sun, 29 Sep 2024 01:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो : 03रेवाड़ी। रेवाड़ी-दादरी सेक्शन में बना टनल। स्रोत : विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत रेवाड़ी-दादरी खंड (128 किमी) पर एक किलोमीटर लंबी रेल सुरंग (टनल) बनकर तैयार हो चुकी है। यह एशिया की पहली ऐसी रेल सुरंग है जो डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनों के संचालन के लिए डिजाइन की गई है।
यह टनल एक हजार करोड़ की लागत से 2 वर्ष में तैयार हुई है। इस रेल सुरंग की चौड़ाई 14.5 मीटर और आंतरिक ऊंचाई लगभग 10.5 मीटर से 12.5 मीटर तक है। इस सुरंग में ओवरहेड इलेक्ट्रिक एक्यूपमेंट लगाए गए हैं। इसमें मालगाड़ियों को 100 किमी प्रतिघंटा के हिसाब से चलाया जा सकेगा। इस फ्रेट कॉरिडोर में 2.76 किमी लंबा वायाडक्ट बनाया गया है, जो 25 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस खंड में तीन नदी पुल, तीन रेल फ्लाईओवर, 24 बड़े पुल, 79 छोटे पुल, 16 सड़क ओवरब्रिज, 32 प्रमुख सड़क अंडरब्रिज, 17 छोटे आरयूबी और 8 फुट ओवरब्रिज शामिल हैं। इस कॉरिडोर से बावल, धारूहेड़ा और भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ होगा। टनल का निर्माण अरावली की पहाड़ियों में गहरी कटाई के बाद किया गया है जो चुनौतीपूर्ण था।
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सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनाया गया विशेष कॉरिडोर

डीएफसीसीआईएल कम्युनिकेशन कॉरपोरेट के उप महाप्रबंधक चित्रेश जोशी ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनाया गया है। 2,843 किलोमीटर लंबाई के दो कॉरिडोर हैं। एक पूर्वी कॉरिडोर है जो लुधियाना के पास साहनेवाल से शुरू होकर के बिहार के सोननगर तक जाता है। दूसरा पश्चिमी कॉरिडोर है जो दादरी से शुरू होकर मुंबई तक जाता है। 2,843 में से 2,741 किलोमीटर कॉरिडोर का काम पूरा हो चुका है, जो प्रोजेक्ट का 96.4 प्रतिशत है। अगले साल ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। दोनों कॉरिडोर को मिलाकर इस पर 350 से अधिक मालगाड़ियां हर रोज चल रही हैं।



माल भेजने में लागत आएगी कम

कॉरिडोर से भारतीय रेलवे को कई तरीके से फायदा होगा। जो लोडिंग रोड पर शिफ्ट हो रहा था, उसको रेलवे पर शिफ्ट किया जा रहा है। ईंधन और पर्यावरण के हिसाब से रेल ट्रांसपोर्ट ज्यादा बेहतर है और ये तेज भी है। कॉरिडोर के चलते माल भेजने में लागत कम आएगी। इसमें माल को नुकसान कम होता है। देश में लॉजिस्टिक्स कॉस्ट अभी 14 से 15 फीसदी है। सरकार का पूरा प्रयास है कि इसको 10 प्रतिशत से कम किया जाए, जो अन्य राष्ट्रों के समकक्ष होगा।
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वर्जन:
डबल स्टैक कंटेनर और डबल ट्रेन के लिए एक किलोमीटर लंबा यह टन एशिया का पहला टनल है। 1000 करोड़ की लागत से यह टनल दो वर्ष में तैयार हुआ। टनल को बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। -वाईपी शर्मा, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर, रेवाड़ी-दादरी सेक्शन।
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