रेवाड़ी। शिक्षाविद् मनोज वशिष्ठ ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भावनाओं और पहचान का सशक्त माध्यम है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसी स्मृति में प्रतिवर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है।आज वैश्वीकरण और डिजिटल युग में हिंदी का प्रभाव बढ़ रहा है। इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन समाचार, ब्लॉग और स्मार्टफोन ने हिंदी को विश्वभर के करोड़ों लोगों तक पहुंचाया है। गूगल इनपुट, यूनिकोड और विभिन्न डिजिटल माध्यमों ने हिंदी लेखन को और आसान बनाया है। संवाद