गावं सुठानी में रात में कूड़े में लगाई गई आग।
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रेवाड़ी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश के बाद भी बावल व धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में रात में जगह-जगह कूड़ा जलाया जा रहा है। वहीं, बिना ढके निर्माण सामग्री डालने के साथ ही बिना हरा पर्दा लगाए इमारतें बनाई जा रही हैं। यह हाल तब है जब जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। शहर की हवा जहरीली बनती जा रही है।
एनजीटी के आदेश पर हो रही कार्रवाई की सच्चाई जानने के लिए अमर उजाला ने कई इलाकों में पड़ताल की तो हर जगह नियमों की धज्जियां उड़ती दिखीं। बावल व धारूहेड़ा में जगह-जगह कचरा व कबाड़ डालकर उसे रात को जलाया जा रहा था। प्लास्टिक और गंदगी जलने के कारण निकल रहे धुएं से लोगों का सांस लेना दूभर था। बावल औद्योगिक क्षेत्र के करनावास के समीप, सुठानी के समीप, औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 3 व 6, पातुहेड़ा के समीप कचरा के ढेरों में आग जलाई जा रही थी। इसके अलावा पातुहेड़ा के समीप कई फैक्टरियों में से जहरीला धुआं निकल रहा था। हालांकि कूड़ा जलाने वाले पर पांच हजार रुपये से अधिक जुर्माने का आदेश है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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पातुहेड़ा के ग्रामीण कर चुके हैं विरोध
पातुहेड़ा के ग्रामीणों के अनुसार उनके गांव के समीप कई कारखानों से रात को जहरीला धुआं छोड़ा जाता है, जिससे रात को आसपास के धुआं फैल जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ कारखानों में रात में भट्ठियां जलाई जाती है, जिससे यहां धुआं निकलता है। इसके विरोध ग्रामीणों द्वारा कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी की गई है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।