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आरक्षण के लिए जाटों ने भरी हुंकार

Tue, 15 Mar 2016 01:38 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला
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ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला
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खिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर जिला महेंद्रगढ़ की संघर्ष समिति ने सोमवार को आरक्षण और आरक्षण आंदोलन के दौरान निर्दोष लोगों पर बनाए  गए केसों को वापस लेने की मांग को लेकर नारनौल लघु सचिवालय में धरना देकर विरोध जताया। इसके बाद दोपहर दो बजे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हवा सिंह लांबा की अध्यक्षता में जिला उपायुक्त संजीव वर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर जाटों को आरक्षण देने सहित अन्य मांगे की। 
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2005-06 में चले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान किसी भी  प्रदेश में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। यह आंदोलन 2005-06 से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब सहित 13 प्रदेशों में लगातार चल रहा है। हरियाणा ही एक मात्र प्रदेश जहां प्रदेश सरकार के अधिकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी, विपक्ष पार्टी के राजनेताओं ने षड्यंत्र के तहत जाट आरक्षण को अपने-अपने ढंग से बदनाम करने का प्रयास किया गया। इस आंदोलन में 18 युवाओं की हत्या कर दी गई। वहीं इससे पूर्व इस आंदोलन में पूर्ववर्ती सरकार के समय 3 जाट युवक शहादत दे चुके हैं। इतना सब  कुछ होने के बाद सरकार जागी और जाटों की मांगों की घोषणा स्वीकार की। 

लघु सचिवालय में रहा पुलिस बल तैनात
जाट आरक्षण की मांगों को लेकर कुछ दिन पूर्व प्रदेश में हुई हिंसा को देखते  हुए सोमवार को लघु सचिवालय में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि जाट आरक्षण की मांग को लेकर लघु सचिवालय में बैठे जाट समुदाय के लोगों द्वारा किसी प्रकार का कोई हुड़दंग आदि करने उनसे सख्ती से निपटा जा सके, लेकिन जाट समुदाय के लोगों शांतिपूर्वक ढंग से अपना विरोध जताते हुए उपायुक्त को  ज्ञापन सौंपा।
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पुलिस अधीक्षक ने की शांति बनाए रखने की अपील
अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के बाद पुलिस अधीक्षक मनीषा चौधरी ने जाट समुदाय के लोगों को अपने कार्यालय में बुलाकर उनसे शांतिपूर्वक अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण के नाम पर पूरे प्रदेश में हिंसा हुई, लेकिन जिला महेंद्रगढ़ में इस प्रकार की कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने जाट समुदाय के लोगों पहले की भांति इस बार भी शांति पूर्वक अपनी बात रखने आह्वान किया। वहीं पुलिस अधीक्षक ने कहा कि  जिला महेंद्रगढ़ किसी भी प्रकार से शांति भंग की कोशिश की गई तो वे उन लोगों से सख्ती से निपटेंगी। इस पर सभी जाट समुदाय के लोगों ने पुलिस अधीक्षक को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने के लिए आश्वस्त किया। 

मांगे तो मानी, पर पूरी नहीं की
जाटों ने कहा कि उनकी सरकार ने आंदोलन के दौरान सात मांगे मान ली थी। मगर इसके  बावजूद भी इन मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसलिए इन मांगों की  तरफ भी ध्यान दिया जाए।

ये हैं सात पुरानी मांगे, जिनपर कार्रवाई करने का सरकार ने भरोसा दिलाया था
- केंद्र सरकार हरियाणा की स्थिति व मांगों को पूरी करने के लिए केंद्रीय मंत्री मंडल के वरिष्ठ मंत्रियों की एक समिति का गठन करे। इससे हरियाणा सरकार द्वारा पैदा की गई अविश्वसनीय स्थिति का संभाला जा सके।
-हरियाणा में पहले अध्याय देश लाकर जाट जाति को पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया  जाएगा। उसके बाद विधानसभा के सत्र में बिल लाकर हरियाणा के जाटों का आरक्षण दिया जाए। 
-केंद्रीय स्तर पर जाटों को आरक्षण के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल लाकर बजट सत्र में प्रदेश व केंद्र सरकार की ओबीसी सूचियों में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाए।
-हरियाणा प्रदेश में गोली चलाने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
-आंदोलन में शहीद हुए परिवारों को उचित मुआवजा व उनके आश्रितों को सरकार नौकरी दी जाए।
-पिछले व वर्तमान आंदोलन के दर्ज हुए मुकद्दमों को रद्द किया जाएगा।
- सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

जाटों के खिलाफ कर रहे ब्यानबाजी
समिति  के अध्यक्ष हवासिंह ने बताया कि उक्त मांगों की घोषणा के बाद भी प्रदेश  सरकार के कई मंत्री जाट बिरादरी और आरक्षण की मांग के खिलाफ लगातार  बयानबाजी कर रहे है। इसके अलावा प्रदेश सरकार व कई मंत्रियों द्वारा  प्रायोजित 35 बिरादरी बनाम जाट का भी घृणित प्रचार किया जा रहा है। जोकि बड़े खेद का विषय है। 

समिति ने सरकार के सामने ये रखी नई मांगे
- 22 फरवरी को प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकार की गई 7 मांगों पर अविलंब निर्णय लिया जाए।
- जाट  बिरादरी के युवाओं और लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने का प्रयास हरियाणा  की जातिवादी सरकार, अधिकारी लगातार कर रहे है। सरकार इन मुकदमों को तत्काल  प्रभाव से वापिस ले। 
- जाट बिरादरी के लोगों से किसी प्रकार की पूछताछ स्थानीय लोगों के सामने की जाए।
- सरकार और उसके मंत्रियों, विधायकों व सांसदों द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- आंदोलन  के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी एवं  प्रदेश के जातिवादी अधिकारियों से जाट समाज को न्याय की कतई अपेक्षा नहीं  है। इसलिए न्यायपूर्ण जांच के लिए केंद्र सरकार एक न्यायिक जांच आयोग किसी  सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित करे। 
-बड़ी संख्या में जाट युवाओं को फर्जी मुकदमों में फंसा कर जेल में डाला जा रहा है। ऐसे  युवाओं को तुरंत रिहा कर न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने तक कोई गिरफ्तारी आदि  कार्यवाही न की जाए।
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-जिन जिलों में आंदोलन शांतिपूर्ण रहा और कोई तोड़फोड़ नहीं हुई ऐसी जगहों पर दर्ज झूठे मामलों को तुरंत रद्द किया जाए। 
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