रेवाड़ी। गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की एकबार फिर मुश्किल बढ़ सकती है, क्योंकि कार्रवाई करने के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से डीईओ और डीईईओ को कार्रवाई के लिए आदेश दिए गए हैं। निदेशालय ने इन स्कूलों को बंद करने के लिए डीईओ व डीईईओ को 10 दिन का समय दिया है। 10 दिन भी पूरे होने वाले हैं।
अधिकारियों का दावा है कि रेवाड़ी में 70 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास विभाग की मान्यता नहीं है, जिन्हें डीईओ व डीईईओ कार्यालय के निर्देश पर बीईओ कार्यालय की ओर से नोटिस भेजा जा चुका है, लेकिन फिर भी स्कूल संचालक गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल को बंद नहीं कर रहे हैं। नए सत्र को शुरू हुए 22 दिन का समय गुजर चुका है, लेकिन विभाग की ओर से फिर भी लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इस कारण अभिभावक भी बच्चों के एडमिशन कराने को लेकर चिंतित हैं।
अधिकारी बार-बार मान्यता देखकर एडमिशन लेने के लिए बच्चों को व अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं, लेकिन नए सत्र शुरू होने के 19 दिन बाद भी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की लिस्ट सार्वजनिक नहीं कर रहे। अब एफआईआर दर्ज कराने की भी बात सामने आ रही है। इसके लिए शिक्षा अधिकारियों की निदेशालय स्तर पर बैठक भी बुला ली गई है। निदेशालय से मिले आदेशों के बाद अब विभाग जल्द ही जिला स्तर पर एफआईआर करा सकता है।
विभाग के मानकों के अनुरूप नहीं हैं स्कूल
मिली जानकारी के मुताबिक सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल विभाग के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, जिस कारण विभाग द्वारा उनको मान्यता नहीं दी जा रही है। इनमें कोई स्कूल ऐसा है, जिसने किसी दूसरी जगह की मान्यता लेने के लिए आवेदन किया और स्कूल कहीं दूसरी जगह पर या दूसरे गांव या शहर में चल रहा है। कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास विभाग के मानकों के अनुरूप बिल्डिंग नहीं है, किसी के पास खेल ग्राउंड नहीं है तो किसी के पास और दूसरे साधन नहीं हैं। इसके अलावा कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जो कागजी कार्य ही पूरे नहीं कर पा रहे हैं, जिस कारण उन्हें मान्यता नहीं मिल रही है।
एडमिशन देकर दूसरे स्कूलों से करवा देते हैं मार्कशीट का जुगाड़
गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल बच्चों को दाखिला दे देते हैं और किसी मान्यता प्राप्त के रिकाॅर्ड में उसका नाम चढ़ा देते हैं। इससे वह बच्चा अगली कक्षा में उत्तीर्ण हो जाता है और बाद में उसका स्थानांतरण सर्टिफिकेट भी बन जाता है। यानी बच्चे का नाम किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में चल रहा होता है और कक्षाएं गैर-मान्यता प्राप्त में चलती हैं। यानी गैर-मान्यता होने के बावजूद बच्चों को एडमिशन देकर उन्हें गुमराह कर देते हैं और उनकी डिग्री का जुगाड़ फिर किसी दूसरे स्कूल से करा देते हैं।
निदेशालय से मिले निर्देशों के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को 10 दिन का समय दिया गया था।
-कपिल पूनिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी।