धारूहेड़ा। औद्योगिक कस्बा धारूहेड़ा स्थित हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी में तीस से अधिक पार्क अनदेखी का दंश झेल रहे हैं। स्थिति यह है कि लगभग सभी पार्क अधिकांश उजड़े हुए हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन हैं। सुधारीकरण के लिए नगर पालिका की ओर से बजट पास किए जाने के बावजूद व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है। यहां न तो बैठने की कोई व्यवस्था है। बच्चों के खेलने के लिए लगाए झूले भी टूट चुके हैं।
कभी यह पार्क सेक्टर की पहचान थे, देखने में सुंदर और हरे भरे पार्क बच्चों के खेलने की जगह होती थी। शाम होते ही यह पार्क बच्चों से गुलजार होने लगते थे। बड़े बुजुर्ग भी सुबह शाम टहलने आते थे, लेकिन रखरखाव की वजह से लोगाें ने इनसे दूरी बना ली है। काॅलोनी की अधिकांश पार्क बदहाल हो चुके हैं। जब हुड्डा के पास थी उस समय पार्को में लाइट लगाई गई थी ताकि शाम के बाद लोगों को टहलने में दिक्कत न हों अब लाइट, सड़क नगर पालिका के अधीन है। लंबे समय से लाइटें खराब हैं। पेड़-पौधे भी सूख गए हैं। सिर्फ नाम का ही पार्क रह गया है।
झाड़ियां और गंदगी लोगों की परेशानी का बने सबब
सेक्टर 6 निवासी राम कुमार झा ने बताया कि पार्क में बच्चों के खेलने के लिए लगाए झूलों सहित अन्य उपकरण बुरी तरह से टूट चुके है जोकि बच्चों को घायल तक कर रहे हैं। समस्या को कई बार नगर पालिका के ध्यान में लाने के बावजूद पिछले कई वर्षों से इन उपकरणों को दुरुस्त करने के लिए नगर पालिका की ओर से कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। कृष्ण कुमार, विनोद कुमार ने बताया कि शुरू में पार्कों में झूले लगाए गए और लाइट की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उसके बाद इसका ध्यान नहीं दिया गया। इससे झूलों सहित अन्य बच्चों के खेलने वाली उपकरण टूट गए। नगर पालिका के अधिकारियों की उपेक्षा के कारण आज यह हाल है। अब पार्क बदहाल हो गए हैं। झाड़ियां और गंदगी लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है। जगजीत सिंह ने कहा कि अधिकांश पार्क की हालत काफी दयनीय है। कस्बा का सबसे पॉश इलाकों में हाउसिंग बोर्ड माना जाता है, पार्कों की सुंदरता बढ़ाने के हरियाली तक नहीं हैं। कुछ पार्क तो कचरे से भरे पड़े हैं। जहां गंदगी होने से मच्छर पनप रहे हैं।
पार्कों की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए टेंडर लगाया जा चुका है। आचार संहिता के बाद वर्क आर्डर जारी होगा।
प्रवीण कुमार, सचिव, नगर पालिका धारूहेड़ा