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Rewari News: 2000 से अधिक बालक-बालिका जान जोखिम में डालकर रोज कर रहे सफर

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रेवाड़ी। ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए जोखिम उठाना पड़ रहा है। बावल उपमंडल के 25 से अधिक गांवों में रोडवेज परिवहन सुविधा के अभाव में 2000 से अधिक बालक-बालिकाओं को रोजाना प्राइवेट वाहनों के पीछे लटक कर सफर करना पड़ रहा है। रेवाड़ी व बावल के कन्या कॉलेज की बालिकाएं रोजाना इसी तरह घर से स्कूल और स्कूल से घर का सफर तय करती हैं, लेकिन ये बालिकाएं अपने बेहतर भविष्य के लिए शिक्षित होना चाहती हैं।
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बावल व रेवाड़ी से इन गांवों की दूरी 15 से 20 किलोमीटर है। यहां कई माह पूर्व बसें चलाई गई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही बंद कर दी गईं। ग्रामीण अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या से कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई तक नहीं की जा रही है।
प्रशासन ने सवारी वाहनों में भी इस कदर सफर पर कभी पाबंदी लगाने का प्रयास नहीं किया। इसलिए धड़ल्ले से बच्चों को वाहन के पीछे लटका कर स्कूल लाने, ले जाने का यह खेल लंबे समय से चल रहा है। कई बार दुर्घटनाएं भी हुई है, लेकिन प्रशासन उनसे भी सबक नहीं ले रहा है। लोगों ने बताया कि रोडवेज और निजी बसों के अभाव में ग्रामीण रूटों के यात्रियों को डग्गामार वाहनों की छतों पर बैठकर यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में जहां यात्रियों को जान जोखिम में डालना पड़ता है, वहीं सर्दी की वजह से उन्हें परेशानी भी होती है। यात्रियों का कहना है कि कई बार तो सर्दी की वजह से यात्रियों की पकड़ ढीली हो जाती है, जिससे उनकी जान पर बन आती है।
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यातायात संसाधनों की कमी
जिले में शहरों से गांव को जोड़ने के लिए पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं है। इस कारण सवारी वाहन चालक अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में ग्रामीण जनता को शहर तक पहुंचाने के लिए वाहन में तय सीमा से ज्यादा सवारियां बैठा रहे हैं। ऑटो से लेकर भारी वाहनों में भी ओवरलोड सफर किया जा रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए यातायात विभाग, पुलिस विभाग व डीटीओ विभाग समय-समय पर खानापूर्ति करते नजर आते हैं। दिखावे के लिए कार्रवाई की जाती है, कुछ समय बाद स्थिति जस के तस नजर आती है। बसें हो या चारपहिया वाहन सभी वाहनों में सवारियों को ठूंस- ठूंस कर यात्रा की जा रही है।
जनप्रतिनिधि भी नहीं करते पहल
जिले के जनप्रतिनिधि भी इस स्थिति से भलीभांति अवगत हैं, लेकिन किसी की भी तरफ से आज तक यातायात संसाधनों को बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। यही कारण है कि आमजन व विद्यार्थी आज भी जान जोखिम में डालकर वाहनों के बाहर लटककर सफर करने को मजबूर हैं।
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इन रूटों पर नहीं परिवहन सेवा
बावल से प्राणपुरा
बावल से झाबुआ
बावल से खेड़ा मुरार
रेवाड़ी से झाबुआ
रेवाड़ी से प्राणपुरा
रेवाड़ी से रायपुर
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कई बार देरी से पहुंचते हैं शिक्षण संस्थान
विद्यार्थियों ने बताया कि चालक सवारियों को प्राइवेट वाहन में भरने के बाद ही गंतव्य तक चलते हैं, जिसके कारण कई बार विद्यार्थी स्कूल या कॉलेज देर से पहुंचते हैं। ऐसे में कई बार तो विद्यार्थियों की वाहन स्वामियों के झगड़ा भी हो जाता है।
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क्या बोले विद्यार्थी
रूट पर लंबे समय से रोडवेज की बसों की चलाने की मांग की जा रही है, लेकिन अधिकारियों की ओर से विद्यार्थियों की बातों को अनसुना किया जा रहा है। जान जोखिम में डालकर प्राइवेट वाहनों में सफर करना पड़ रहा है।
मीनाक्षी, प्राणपुरा
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रोडवेज की बसें लंबे समय से नहीं चल रही है, जिसकी वजह से ऑटो आदि में लटक कर यात्रा करनी पड़ रही है। कई बार तो हादसे भी चुके हैं। संबंधित अधिकारियों को भी कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
पूनम, टीकला
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रोडवेज की बसों के अभाव में ऑटो व जीप आदि में सफर करना पड़ रहा है। यात्री अधिक होने की वजह से कई बार उन्हें लटक कर भी कॉलेज पहुंचना पड़ता है। इसके अलावा प्राइवेट वाहन चालक महंगा किराया भी वसूलते हैं।
रितिका, नांगल तेजू
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हमारे अभिभावकों के अलावा विद्यार्थियों की ओर से भी इन रूटों पर रोडवेज की बसों को चलाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं। रोडवेज के अभाव में कई बार वे कॉलेजों में भी देर से पहुंचते हैं।
लोकेंद्र, जैतपुर
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वर्जन
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। एक बार उन्होंने बसें चलवाई थी। अगर बसों को बंद कर दिया गया है तो रोडवेज महाप्रबंधक से बात कर रोडवेज की बसों को चलाया जाएगा। बेटियों को स्कूल व कॉलेज आवागमन में कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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-संजीव कुमार, एसडीएम बावल
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