संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। नगर पालिका परिसर में 15 लाख रुपये खर्च कर लगाई गई लिफ्ट अब शोपीस बनकर रह गई है। जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को परेशानी हो रही है। कई बार यह समस्या अधिकारियों के संज्ञान में लाई जा चुकी है। फिर भी कोई समाधान नहीं किया गया।
करीब 2 करोड़ 87 लाख 91 हजार रुपये के बजट से निर्मित नगर पालिका भवन में बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुविधा के लिए लिफ्ट लगाई गई थी। जो एक महीने बाद ही बंद हो गई और अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब तक बंद पड़ी है। लिफ्ट जिस समय बंद हुई थी तब उसके अंदर एक युवक करीब चार घंटे तक फंसा रहा था। कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला जा सका था।
प्रतिदिन 10 हजार लोग आते हैं
बहुमंजिला इमारतों में जल्दी पहुंचने के लिए लिफ्ट को काफी सही माना जाता है। मंजिल तक पहुंचने के लिए लिफ्ट से एक तरफ लोग थकते नहीं, वहीं दूसरी ओर इससे लोगों का समय भी बचता है। नगर पालिका परिसर में करीब 106 गांवों के प्रतिदिन 10 हजार लोग आते हैं जो लिफ्ट न होने से काफी परेशान होते हैं, लेकिन फिर भी अधिकारी इसे गंभीरता नहीं ले रहे।
लोग बोले -प्रशासन ने बड़े दावे किए थे
बंद पड़ी लिफ्ट के कारण सबसे अधिक दिव्यांगों, बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी होती है। अजीत, पवन, नरेश, कुलदीप, सरजीत, जगदीश व ईश्वर ने बताया कि जब भवन का निर्माण किया था तो प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि बावल में लिफ्ट लगाई जा रही है जिससे डिजिटल कार्यालय बताया गया था और बड़ी वाहवाही लूटी गई थी लेकिन सालभर भी लिफ्ट नहीं चलने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नगरपालिका द्वारा लिफ्ट को ठीक करवाना चाहिए, जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। लिफ्ट न होने की वजह से सीढि़यों पर कई बार बुजुर्ग फिसलते रहते हैं। अगर बड़ा हादसा हो गया तो फिर जिम्मेदार कौन होगा।
-हरिओम एडवोकेट।
यहां बुजुर्गों, दिव्यांगों व महिलाओं के लिए लिफ्ट जरूरी है। सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए लिफ्ट लगवाई थी। इसकी मरम्मत करवाकर जल्द से जल्द ठीक करवाई जाए।
- जगदीश पहलवान।
मामला मेरे संज्ञान मे हैं। इसका टेंडर किया जा चुका है। जल्द ही लिफ्ट को ठीक करवा दिया जाएगा। लोगों को बिल्कुल भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- वीरेंद्र एडवोकेट, चेयरमैन नगरपालिका बावल।