रेवाड़ी। जिले में आग बुझाने के संसाधन नाकाफी हैं। इसके अभाव में दमकल का ही दम निकलता नजर आ रहा है। हालात यह है कि घटना स्थल पर आग बुझाने के लिए गाड़ियाें में पर्याप्त पानी ही नहीं रहता है। शहर के कार शोरूम में शनिवार को लगी आग बुझाने के दौरान दोपहर करीब एक बजे ही सभी गाड़ियों में पानी खत्म हो गया था, जिससे कुछ देर के लिए राहत कार्य को रोक दिया गया था।इसके बाद दमकल की गाड़ियां 500 मीटर दूर धारूहेड़ा चुंगी स्थित जलघर से पानी लाना पड़ा। इतनी देर में नुकसान ज्यादा हुआ।
इसके अलावा यहां हाइड्रोलिक प्लेटफाॅर्म दमकल की भी लंबे समय से जरूरत बनी हुई है। कार शोरूम में आग लगने के दौरान राहत कार्य के समय इसकी कमी साफ तौर पर देखी गई। अगर हाइड्रोलिक प्लेटफाॅर्म दमकल की व्यवस्था होती तो संभवतया प्रथम तल पर लगी आग पर समय से पहले ही काबू पाया जा सकता था। हालांकि अधिकारी विभाग के पास पूरे संसाधन होने की बात कह रहे हैं।
जिले की कुल सात तहसील और तीन उपतहसील में अग्निशमन केंद्र ही नहीं हैं। जिले में आग बुझाने के लिए मात्र 15 गाड़ियां उपलब्ध हैं। इनमें बावल में चार, कोसली में दो और धारूहेड़ा में दो गाड़ियां हैं। इतना ही नहीं संसाधनों के अभाव से जूझ रहे विभाग के पास कर्मियों की भी कमी है। अधिकतर कर्मचारी ठेके पर भर्ती हैं। हालांकि दमकल कर्मी किसी भी आग की घटना से निपटने के लिए जी-जान लगा रहे हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में कई बार वह उतना बेहतर नहीं कर पा रहे, जितना उनसे उम्मीद की जाती है। हालात तब गंभीर हो जाते हैं, जब एक ही समय में कई स्थानों पर आग लगने की सूचनाएं मिलती हैं।
मार्च से सितंबर तक सात बड़ी घटनाएं
मार्च से लेकर सितंबर तक आग लगने की सात घटनाएं हुई हैं। कभी कबाड़ के गोदाम में आग तो कभी कपड़ों के शोरूम में आग की घटना ने दमकलकर्मियों को छकाये रखा है।
15 मार्च : बावल औद्योगिक क्षेत्र के नैचाना रोड पर कबाड़ के गोदाम में भीषण आग लगी।
8 अप्रैल : रेवाड़ी शहर के मुख्य बाजार में कपड़े के शोरूम में भीषण आग लगगी।
12 अप्रैल : गांव आकेड़ा में कबाड़ के गोदाम में भीषण आग लगी। इसके अलावा बावल रोड व दिल्ली रोड पर भी आग लगने की घटनाएं हुई।
9 सितंबर : रेवाड़ी शहर के कार शोरूम में आग लगी।
वर्जन
शोरूम में लगी आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच गई थीं। दमकलकर्मी ईमानदारी से कार्य कर रहे थे, लेकिन धुआं अधिक होने से घुटन होने लगा था। इससे कुछ देर काम को रोका गया था। वैसे विभाग के पास संसाधन भी पर्याप्त है।
-मामचंद शर्मा, सहायक दमकल अधिकारी रेवाड़ी।