सोमवार को रेवाड़ी के दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित मालपुरा में बनाए गए शेल्टर होम में उस समय खलबली मच गई, जब दर्जनों श्रमिकों के बीच 14 श्रमिक ऐसे पाये गए, जिनके हाथों पर क्वारन्टीन की मोहर लगी हुई थी। यह सभी कुछ दिन पहले ही गुजरात से यूपी जाने के लिए पैदल निकले थे, लेकिन दो दिन पहले इन्हें राजस्थान में एक राहत शिविर में पकड़ने के बाद उनकी जांच के बाद उन्हें 14 दिन के लिए क्वारन्टीन कर हाथों पर मोहर लगा दी थी। लेकिन वे सभी चकमा देकर राहत कैंप से भाग निकले और सोमवार को रेवाड़ी पहुंच गए। रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब सभी की दोबारा से जांच कर रहे हैं। सूचना के बाद आला अधिकारी भी शाम के समय शेल्टर होम पहुंचे। रेवाड़ी से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे नंबर-8 पर मालपुरा गांव में जिला प्रशासन ने शेल्टर होम बना रखा था। इसकी जिम्मेदारी गांव के सरपंच मलखान सिंह ने रखी थी। रविवार रात से ही इसमें काफी संख्या में मजदूर रुके हुए थे। सोमवार सुबह मल्खान सिंह की नजर एक मजदूर के हाथ पर पड़ी, उसके हाथ पर होम क्वारन्टीन की मुहर लगी हुई थी। ये देखते ही उनके दिमाग में घंटी बजी और एक-एक करके सब मजदूरों के हाथ चेक किए। ऐसा करने पर 14 मजदूर मिले, जिनके हाथ पर राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने होम क्वारन्टीन की मुहर लगाई थी, लेकिन वे नहीं रुके। रेवाड़ी के रास्ते यूपी के शामली जा रहे थे। मलखान सिंह ने इसकी सूचना पुलिस व स्वास्थ्य विभाग को दी। इसकी जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मालपुरा पहुंची। उन्होंने एक-एक मजदूर से पूछताछ की। धारूहेड़ा स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. जय प्रकाश का कहना है कि इन मजदूरों की मेडिकल हिस्ट्री को जाना है। अभी तक उनमें कोरोना जैसे कोई लक्षण नहीं मिले हैं, फिर भी जांच की जा रही है।