रेवाड़ी। ब्रज गोपिका सेवा मिशन की तरफ से श्री कृष्ण भवन में संचालित प्रवचन के अंतिम दिन डॉ. युगल स्वामी ने अपने मुखारविंद से कर्मयोग में रहकर किस प्रकार साधना करनी है, उसका विस्तृत ज्ञान दिया। साथ ही भगवान के मधुर स्वरूप के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इन्द्रिय, मन, बुद्धि से परे एवं ज्ञाता स्वरूप जिस निर्विशेष ब्रह्म की प्राप्ति के लिए असंख्यों जप एवं तप करने वाले वर्षों तक भटका करते हैं एवं जिसके लिए योगी लोग अष्टांग योग करने के पश्चात् योग की अग्नि में जलकर भस्म हो जाते हैं। फिर भी भगवान की किंचित भी कृपा को साधन बल से नहीं प्राप्त कर पाते हैं। गुरुदेव कहते हैं कि वही पूर्णतम पुरुषोत्तम ब्रह्म श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा की गोद में जाने के लिए पृथ्वी पर लौटता हुआ अत्यन्त व्याकुलतापूर्वक रो रहा है, जिसका अभिप्राय यह है कि मैया मुझे गोद में ले ले।