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कहने को आदर्श गांव है किशनपुर, सुविधाओं के नाम कुछ खास नहीं

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जिले के बावल खंड का गांव किशनपुर कहने को तो आदर्श गांव है मगर यहां सुविधाओं और बड़ी उपलब्धि के नाम पर कुछ खास नहीं है। सांसद निधि से इस गांव को एक पाई तक नहीं मिली। बावल विधायक एवं सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल से इस गांव में 40 लाख रुपये से अधिक धनराशि विकास कार्य कराने के लिए मिली है।
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गांव में पंचवर्षीय योजना में रास्तों के लिए सरकारी अनुदान मिला और इसका असर साफ दिखाई देता है। अनुसूचित जाति की चौपाल की चहारदीवारी की ईंटें तक उखड़ गई हैं। गांव में स्ट्रीट लाइट का सही से रखरखाव नहीं होने की वजह से आधी से अधिक बेदम हो चुकी हैं। करीब दस हैंडपंप भी दम तोड़ चुके हैं। कुछ निहत्थे खड़े हैंडपंप मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं कि हमें यहां क्यों लगाया था।
बावल उपमंडल मुख्यालय से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में आज के दिन राजकीय प्राथमिक पाठशाला तक नहीं है। इसकी वजह यहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 20 से कम होना रहीं इस वजह से यह पाठशाला पंचायत से प्रस्ताव लेकर गांव रानौली के सरकारी विद्यालय में मर्ज कर दी गई। इस गांव में डाकघर, पशु अस्पताल, बैंक, सहकारी समिति कार्यालय, खेल मैदान और पुस्तकालय तक उपलब्ध नहीं है। गांव में बावल उपमंडल से राज्य परिवहन की एक बस सुबह शाम आवागमन करती है। इसके अलावा ग्रामीण निजी साधनों से जिला और उपमंडल मुख्यालय आना जाना करते हैं।
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अगर बात करें गांव में उपलब्ध सुविधाओं की तो आंगनबाड़ी केंद्र और जलापूर्ति केंद्र को छोड़कर गांव में कोई सुविधा नहीं है। शिक्षा के लिए अब गांव किशनपुर के बच्चों को निजी स्कूल या फिर गांव रानौली के सरकारी स्कूल में जाना पड़ता है। इन बच्चों को बीच राह में गंदे जलभराव की समस्या को झेलते हुए रोजाना विद्यालय से घर तक आवागमन करना पड़ता है। पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अस्पताल नहीं है। किसान पशुपालक ऐसी सूरत में रानौली में बीमार पशु को इलाज कराने ले जाते हैं या फिर चिकित्सक को फोन करके बुलवाया जाता है।
650 मतदाता हैं गांव में
इस गांव की आबादी करीब 800 है जिसमें 650 से अधिक मतदाता हैं। गांव में सामुदायिक सभागार, वाचनालय और पंचायत घर बनाए जाने की जरूरत है। गांव में पंचायत समिति ने एक लाख रुपये अनुदान देकर करीब 5 स्ट्रीट लाइटें लगवाई थीं जिनमें से कुछ चालू अवस्था में हैं जबकि पंचायत की ओर से लगवाई गई स्ट्रीट लाइटों में से अधिक से अधिक काम करना छोड़ गई हैं।
ग्रामीण कृष्ण बताते हैं कि शमशान घाट को जाने वाला रास्ता करीब 500 मीटर अधूरा पड़ा है। गांव में नशा करने और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों से पुरुषों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर असंतोष है। ग्रामीणों ने मल निकास नालियों की सफाई पर भी सवाल उठाया। ग्रामीणों ने पिछली पंचायत के कार्यों पर संतोष जताते हुए कहा कि अभी गांव में खेल का मैदान और पुस्तकालय की स्थापना की जानी चाहिए। गांव में नाग देवता का मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। गांव में मल निकास नालियों की व्यवस्था को दुरुस्त किए जाने की जरूरत है।
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ग्रामीण बोले -
युवाओं को तकनीकी कौशल सिखाने के लिए कोई केंद्र सरकार की ओर से खोला जाए तो बेहतर होगा। - राजेश कुमार।
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गांव में स्ट्रीट लाइट खराब हैं, इनका सही से रख रखाव होना चाहिए। गांव में विकास के काम तेजी से हों। - नवीन।
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असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जाने की जरूरत है। महिलाओं को सुरक्षापूर्ण माहौल मिलना चाहिए। - विनोद
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जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, इससे लोग परेशान हैं। अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं। - हवा सिंह
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प्रमुख समस्याएं
- जलापूर्ति व्यवस्था, महिला सुरक्षा, मद्यपान
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जरूरत क्या
गांव में पुस्तकालय, कौशल विकास केंद्र, स्ट्रीट लाइट की दुरुस्ती, अस्पताल और पशु स्वास्थ्य केंद्र खुले, बेहतर परिवहन व्यवस्था, युवाओं के लिए खेल मैदान की आवश्यकता है।
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जनप्रतिनिधि बोले
पंचायत समिति बावल के वार्ड 15 में पांच गांव हैं। अब नई वार्ड बंदी में वार्ड नंबर 8 हो गया है। पंचायत के साथ सही तालमेल नहीं बैठने की वजह से ग्राम विकास प्रभावित हुए, यह सच है। हमने अपनी ओर से विकास कार्यों को पूरा कराने में पूरा सहयोग दिया। प्रदेश सरकार की ओर से पंचायत समिति को विकास कार्यों के लिए दी गई धनराशि में से हमने एक लाख रुपये की स्ट्रीट लाइट, आम रास्ते और अनुसूचित जाति चौपाल पर काम कराया है। हमने पूरा और सही दिशा में प्रयास किया और उसका लाभ भी मिला।
- सुखविंद्रा, पूर्व सदस्य पंचायत समिति बावल।
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- निवर्तमान सरपंच बोली
हमें सांसद निधि से कुछ नहीं मिला। सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल से विकास के लिए 40 लाख रुपये से अधिक धनराशि मिली जिससे आम रास्ते, आंगनबाड़ी केंद्र, अनुसूचित जाति चौपाल संबंधी कार्य कराए गए। पंचायत समिति के चेयरमैन वीरेंद्र छिल्लर की ओर से कुछ धनराशि आई थी, जिससे 5-7 स्ट्रीट लाइट लगी और बाद पंचायत ने अपने कोष से सारे गांव में ऐसी 60 लाइट लगवाई और अब आधी चालू हैं। शमशान घाट के रास्ता 300 फुट अधूरा है। प्रस्ताव एसडीएम बावल संजीव कुमार को दिया हुआ है। वे मौका मुआयना कर गए हैं। पंचायत के खाते में धन मौजूद है। अब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद यह काम हो पाएगा। यह सच है कि युवाओं के लिए खेल मैदान और पुस्तकालय नहीं है। पंचायत के पास जमीन नहीं है, इस वजह से यह समस्या है। दो-तीन बार उपायुक्त को भी शिकायत दी जा चुकी है। - मंजूदेवी, सरपंच।
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