रेवाड़ी। जिला प्रशासन की सख्ती के बाद स्कूल संचालकों की तरफ से बसों में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस लगवाने के लिए ऑर्डर दिए जा रहे हैं। जिले में प्राइवेट स्कूलों की संख्या तकरीबन 351 है।
शहर में करीब 25 से ज्यादा दुकानदार कैमरे लगाने का कार्य करते हैं। स्कूल बसों में कम से कम दो कैमरे लगाने जरूरी हैं। एक ड्राइवर के पास कैमरा होना चाहिए और एक पीछे की ओर कैमरा लगना आवश्यक है। दुकानदार मुकेश और रामपाल ने बताया कि स्कूल बसों के लिए 4 हजार रुपये से लेकर 7 हजार रुपये तक का सीसीटीव कैमरा बेहतर है। जिन स्कूलों से मांग की गई अधिकतर यही कैमरे वाहन में लगवा रहे हैं।
जीपीएस के लिए भी कमोवेश इतनी ही मांग है। ब्रांडेड जीपीएस 4 से 5 हजार में आता है। मौजूदा समय में अपेक्षा से ज्यादा आर्डर आ रहे हैं। इसको पूरा करने में जुटे हुए हैं। दुकानदारों का कहना है कि कारोबार में 50 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिल रहा है। निजी स्कूल संचालक फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। इसके बावजूद बसों में कमियों को पूरा नहीं किया जाता रहा। जब प्रशासन एक्शन मोड में आ गया तो स्कूल संचालकों ने बसों में व्यवस्था को दुरुस्त करना शुरू किया। जबकि अभिभावक बस का भी अलग से किराया देते हैं।
जीपीएस के माध्यम से स्कूल प्रबंधन के पास वाहन की गति, तय की गई दूरी और यात्रा पूरी करने में लगने वाले समय की जानकारी होती है। इससे यह भी पता चलता है कि ड्राइवर गाड़ी कितनी गति में चला रहा है। क्या वह सुरक्षा के नियमों का पालन कर रहा है या नहीं। अभिभावक भी पता लगा सकते हैं कि बच्चा अभी कहां तक पहुंचा है। कैमरे के माध्यम से मौके पर हो रही गतिविधियों के बारे में पता चलता है।
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फिटनेस टेस्ट में ये मिलीं कमियां
फिटनेस टेस्ट के दौरान बसों में जो कमियां मिली हैं, उनमें मुख्य रूप से स्पीड 50 किलोमीटर से ज्यादा, रिफ्लेक्टर टेप गायब, कैमरे काम नहीं कर रहे। लोकेशन ट्रेस करने के लिए लगाए गए जीपीएस सही से काम नहीं कर रहे। ज्यादातर बसों में जीपीएस चला ही नहीं पाए। हेड व टेल लाइट, इंडीकेटर, हॉर्न, फर्स्ट एड बॉक्स, फायर सिलिंडर, बैक गियर लाइट व अन्य शामिल हैं।
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मानक पूरा करने के लिए 10 दिन का दिया गया समय
महेंद्रगढ़ जिले में स्कूल बस पलटने की वजह से 6 बच्चों की मौत हो गई थी। कई बच्चे घायल हो गए थे। इसके बाद से ही स्कूल बसों को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। लगातार स्कूल बसों पर कार्रवाई की जा रही थी। इसकी वजह से प्राइवेट स्कूलों ने तो अपने स्कूल बंद करने का ऐलान कर दिया था। फिर डीसी से मीटिंग होने के बाद निजी स्कूल संचालकों को 10 दिनों के अंदर बसों में कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए थे।