रेवाड़ी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेवाड़ी विमल कुमार के निर्देशानुसार शुक्रवार को जिला न्यायालय रेवाड़ी में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में डालसा सचिव एवं सीजेएम वर्षा जैन ने बताया कि बाल यौन शोषण एवं अपराध के प्रति लोगों में संवेदनशीलता जगाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेवाड़ी समय-समय पर विभिन्न कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि 2018 में पॉक्सो एक्ट में संशोधन करके 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे के साथ यौन अपराध पर फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ यौन अपराध के लिए उम्रकैद की सजा दी जाती है और पॉक्सो के अंतर्गत उम्रकैद की सजा का अर्थ आजीवन कैद है। उन्होंने आह्वान किया कि लैंगिक अपराध या कोई भी गलत कृत्य होने पर तुरंत पुलिस में सूचना दें। ऐसा अपराध छिपाना भी अपराध है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा बाल संरक्षण के लिए हेल्पलाइन नम्बर 1098 जारी किया गया है।
इस कार्यशाला में शक्ति वाहिनी एनजीओ से प्रियंका ने उपस्थित सभी महिलाओं को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम के बारे में बताया। उन्होंने बताया की बाल यौन शोषण एवं अपराध की घटनाएं केवल आज ही नहीं, पहले भी होती रही हैं। आज लोगों में इसके प्रति जागृति बढ़ी है। हम इस विषय पर खुलकर बात कर पाते हैं। इस कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग से आंगनबाड़ी वर्कर और सुपरवाइजर उपस्थित रहे।