आपातकाल में जेल में रहने के दौरान मिला ताम्रपत्र
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रेवाड़ी हालांकि आपातकाल की घोषणा तो 25 जून की मध्य रात्रि हुई थी लेकिन अधिकांश विपक्षी विशेषकर संघ ( RSS ) के बडे नेताओं को दिन में ही गिरफ्तार कर जेलों में या कहीं अज्ञात स्थानों पर नजरबन्द करना शुरू कर दिया था । संयोग से उस समय रोहतक में संघ ( RSS ) का कैम्प (OTC ) चल रहा था जिसमें वीरकुमार यादव भी प्रशिक्षिण ले रहे थे ,और वहीं से उन जैसे युवा स्वयं सेवकों को संघ के अधिकारियों ने भूमिगत ( underground ) हो कर नाम व भेष बदलकर आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने का निर्देश दिया गये । यहा ये भी उल्लेखनीय है कि इसी कैम्प के दौरान ही 10 जून को वीरकुमार यादव की शादी की औपचारिकता भी पूरी हुई थी क्योंकि शादी से एक दिन पहले जाकर उन्हें अगले दिन ही वापस कैम्प मे आना पडा था । जिसके चलते उनके जुम्मे \" दर्पण \" नामक पत्रिका जिसमें दिनप्रतिदिन सरकार द्वारा नेताओं की गिरफ्तारीयाँ तथा उन पर व आम लोगों पर हो रहे अत्याचार एवं दमनकारी घटनाओं की जानकारियां प्रकाशित की जाती , को जीन्द , हिसार व सिरसा जिलो के विशेष लोगों तक पहुंचाने का जोखिम भरा काम इनके जुम्मे लगाया गया । साथियों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री श् बनारसीदास की जनसभा में ही आपातकाल व सरकार विरोधी नारे लगाते हुए गिरफ्तारियां दी और इन्हें आपातकाल समाप्त होने तक हिसार जेल में डाल दिया।