संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा ने हेल्थ कंपनी को शिकायतकर्ता के इलाज में खर्च हुए 6,60,561 रुपये व 50,000 रुपये अतिरिक्त तथा 11,000 रुपये वाद खर्च के देने के आदेश दिए हैं। साथ ही उन्होंने शिकायत दर्ज की तिथि से कुल प्रतिपूर्ति देय तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज समेत निर्णय की तिथि से 60 दिनों के अंदर अदा करने को भी कहा है। निर्धारित समय अवधि में अदा नहीं करने के सूरत में 12 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया।
आयोग रेवाड़ी के समक्ष उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 के तहत गांव फदनी निवासी मुकेश यादव ने एक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ इलाज के दौरान हुए खर्च की पूर्ति के लिए एक शिकायत रमेश चंद्र एडवोकेट की मार्फत दायर की थी। आयोग के अध्यक्ष ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा है कि यदि कंपनी आदेश की अनुपालना नहीं करेगी तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 71 तथा 72 के तहत 3 साल की कैद या एक लाख रुपये जुर्माना या फिर दोनों भुगतना होगा।
यह था मामला
पीड़ित के एडवोकेट रमेश चंद्र ने मामले के तथ्यों का संक्षिप्त वर्णन करते हुए बताया कि मुकेश कुमार यादव ने अपनी और अपनी पत्नी के नाम पर एक हेल्थ पॉलिसी इंश्योरेंस कंपनी से वर्ष 2019 करवाई थी जो अभी तक भी जारी है। वर्ष 2021-2022 की पॉलिसी के मुताबिक बीमित राशि 6,25,000 + 1,25,000 बोनस थी। यानी मरीज बीमार होने पर कुल 7,50,000 तक इलाज करवा सकता था। इस दौरान मुकेश कुमार अचानक 13 सितम्बर 2021 को बीमार हो गए और उनको निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां पर दो दिन उनका इलाज हुआ। दो दिन बाद फिर से तबीयत खराब हो गई और दोबारा बीमार होने पर मरीज को निजी अस्पताल गुड़गांव में भर्ती कराया गया।
कंपनी ने रेवाड़ी अस्पताल के इलाज का खर्च तो शिकायतकर्ता को अदा कर दिया, लेकिन गुरुग्राम अस्पताल का इलाज खर्च 66 हजार 561 रुपये अदा करने से इंकार कर दिया। इंश्योरेंस कंपनी ने मनमाफिक आधार पर यह कहकर साफ इंकार कर दिया कि मरीज को 3 साल से दिल की बीमारी है। मरीज ने हार्ट की बीमारी के इलाज के डाक्यूमेंट्स बार-बार मांगने पर भी कंपनी के पास जमा नहीं करवाये, जबकि मुकेश कुमार यादव अतीत में कभी भी हार्ट की बीमारी का मरीज नहीं रहा। निजी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने मरीज को यह सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया कि इस मरीज को अतीत में कभी भी डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कार्डिक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कोई बीमारी नहीं थी।