संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शिक्षा विभाग के समग्र शिक्षा अभियान द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की सेहत की पूरी जानकारी रखी जाएगी। इसको लेकर 15 और 16 मई को जिले की सीएचसी में कार्यरत एएनएम और हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के सीएचओ ( कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) को एचबी टेस्टिंग किट की ट्रेनिंग दी जाएगी।
जिले की सीएचसी में 350 एएनएम और 90 सीएचओ कार्यरत हैं। इनको हिमोग्लोबिन टेस्ट की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। जो टेस्टिंग किट आएगी, उससे स्कूलों में बच्चों के हिमोग्लोबिन टेस्ट कैसे करेंगे, यह बताया जाएगा। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जुलाई माह में स्कूलों में यह सेहत अभियान शुरू हो जाएगा। जिले में 642 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें 396 प्राइमरी, 96 मीडिल, 54 हाई स्कूल और 96 सीनियर सेकेंडरी हैं। इनमें 75 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं।
इस कार्यक्रम के तहत विशेष यह रहेगा कि बच्चों की जांच के बाद पूरा डाटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे बच्चों की पूरी डिटेल पंचकूला में बैठे आला अफसर भी देख सकेंगे कि किस जिले में एनीमिया से पीड़ित बच्चे ज्यादा हैं। यह अभियान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा है।
मई में दी जाएगी ट्रेनिंग
इसमें पहले मई में यह ट्रेनिंग होगी। इसके बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जुलाई में स्कूल खुलने पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम की ओर से प्रत्येक स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। जांच के दौरान बच्चों में एचबी और अन्य टेस्ट किए जाएंगे। फिर उनका पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर चढ़ाया जाएगा। जैसे कितने बच्चे स्वस्थ मिले हैं और कितने बच्चों में खून की कमी मिली है।
साल में दो बार जांची जाएगी सेहत
समग्र शिक्षा अभियान की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम के साथ मिलकर यह जांच अभियान साल में दो बार चलेगा। इससे बच्चों की सेहत का पता रहेगा। जिन बच्चों में खून की कमी मिलती है, उनको पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। ताकि उनका स्वास्थ्य सुधार हो सके। पहला अभियान जुलाई में शुरू होगा।
टेस्टिंग किट होगी उपलब्ध
बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए एचबी टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई जाएगी। यह जांच अभियान
सीएचसी अनुसार चलेगा। जिले में बावल, मीरपुर, नाहड़, खोल व गुरावड़ा सीएचसी के अंतर्गत ही शिक्षा विभाग के भी 5 ही ब्लॉक हैं। इन ब्लॉक अनुसार ही यह जांच कार्य किया जाएगा।
जिले की सीएचसी में 350 एएनएम और 90 सीएचओ कार्यरत हैं। इन सभी को बच्चों की जांच करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। जिसके बाद जुलाई में बच्चों की सेहत की जांच की जाएगी।
- हेमंत कुमार, एपीसी समग्र शिक्षा रेवाड़ी।