रेवाड़ी। एयर क्वालिटी में सुधार के बाद ग्रैप-3 की पाबंदियों को हटा लिया गया है। बीते साल 22 दिसंबर को एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए ग्रैप के तीसरे चरण को लागू किया गया था। ग्रैप-3 की पाबंदियां हटने के बाद बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल कार चालकों को राहत मिली है। अब बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल कारों को दिल्ली की सड़कों पर चलाने की अनुमति होगी। ग्रैप-3 की पाबंदी हटाने जाने के बाद अब निर्माण और तोड़फोड़ पर लगी रोक को भी हटा दिया गया है। सीएक्यूएम की तरफ से कहा गया है कि एक्यूआई में सुधार को देखते हुए ग्रैप-3 के नियमों को दिल्ली-एनसीआर से तुरंत हटाया जा रहा है। मौजूदा समय में जिले का एक्यूआई रोजाना 200-250 के बीच में दर्ज किया जा रहा है। फिलहाल रोक हटने से रेवाड़ी के लोगों को भी काफी फायदा होगा, क्योंकि रोजाना यहां से बड़ी संख्या में लोग वाहनों से आते जाते हैं।
प्रदूषण का स्रोत ढूंढने के लिए शुरू नहीं हुआ अध्ययन
दूसरी तरफ लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण भविष्य को लेकर भी चिंता सताने लगी है। इसी को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अध्ययन करने के लिए कहा था, ताकि इसमें यह पता लगाया जा सके कि जिले में प्रदूषण का कारण क्या है। इसे किस प्रकार से कम किया जा सकता है। धुआं किन क्षेत्रों से अधिक उठता है। हैरानी वाली बात यह है कि अभी तक जिले में यह अध्ययन शुरू ही नहीं हुआ है, जबकि जिला एनसीआर क्षेत्र में आता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनजीटी को दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि हरियाणा में मात्र दो जिलों में ही अभी अध्ययन शुरू हुआ है जो बाकी एनसीआर के क्षेत्र हैं वहां पर अभी अध्ययन की शुरुआत ही नहीं हुई है।
धारूहेड़ा और बावल औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से प्रदूषण अधिक
बता दे कि धारूहेड़ा-भिवाड़ी, बावल इन क्षेत्रों में काफी अधिक प्रदूषण है। हालांकि यहां पर स्थिति सुधारने की भी कोशिश की गई, मगर वह कुछ ज्यादा कामयाब नहीं हो पाई है। सबसे ज्यादा हालात धारूहेड़ा में खराब होते हैं। धारूहेड़ा एक औद्योगिक क्षेत्र है। यहां पर हर साल प्रदूषण की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। धारूहेड़ा के बाद बावल दूसरे नंबर पर आता है। यह भी औद्योगिक क्षेत्र बनता जा रहा है। यहां पर भी प्रदूषण की वजह से काफी परेशानी होती है।
अभी स्टेज 1 और 2 की पाबंदियां लागू रहेंगी
स्टेज 1 पर लगती हैं ये पाबंदियां
निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकलने वाली धूल और मलबे के प्रबंधन को लेकर निर्देश लागू होंगे।
सड़कों पर जमी धूल को उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाएगा।
खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध रहेगा। ऐसा करने पर जुर्माना वसूला जाएगा।
जहां ट्रैफिक ज्यादा होता है, वहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती होगी।
पीयूसी के नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। गाड़ियां बिना पीयूसी के नहीं चलेंगी।
एनसीआर में कम से कम बिजली कटौती होगी।
डीजल जनरेटर का इस्तेमाल बिजली के लिए नहीं होगा।
स्टेज 2 की पाबंदियां
हर दिन सड़कों की सफाई होगी। जबकि हर दूसरे दिन पानी का छिड़काव किया जाएगा।
होटल या रेस्टोरेंट में कोयले या तंदूर का इस्तेमाल नहीं होगा।
अस्पतालों, रेल सर्विस, मेट्रो सर्विस जैसी जगहों को छोड़कर कहीं और डिजिटल का इस्तेमाल नहीं होगा।
लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके लिए पार्किंग फीस बढ़ा दी जाएगी।
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खराब एक्यूआई सेहत के लिए हानिकारक
0-50 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक को अच्छा 51-100 के बीच संतोषजनक
101-200 के बीच मध्यम और 201-300 के बीच खराब माना जाता है।
301 और 400 के बीच एक्यूआई बढ़ने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता बहुत खराब है और लंबे समय तक रहने से श्वसन संबंधी बीमारी हो सकती है।
401-500 की सीमा में एक्यूआई गंभीर श्रेणी में आता है, जो मौजूदा बीमारियों से पीड़ित लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी समस्या पैदा करता है।
दिन एक्यूआई
3 दिसंबर 217
2 दिसंबर 197
1 दिसंबर 233
31 दिसंबर 245
30 दिसंबर 250
प्रदूषण के स्तर को देखते हुए ग्रैप-3 की पाबंदियां को हटा दिया गया है। फिलहाल लोगों से अपील है कि कूड़ा न जलाएं। -हरीश, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड