संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। देश भर में एक जुलाई से नए कानून लागू हो जाएंगे। अब भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) ने ले ली है।
एसपी गौरव ने सभी पुलिस अधिकारियों को नए कानूनों के बारे में दिशा निर्देश दिए है। उन्होंने नए कानूनों के बारे में वर्कशॉप के माध्यम से दी गई जानकारी का गहनता से अध्ययन करने की हिदायत दी ताकि पुलिस कार्यशैली को अधिक प्रभावी बनाकर आरोपियों को सजा दिलाई जा सके। एसपी ने कहा कि पुलिस प्रस्तावित नए कानूनों को लागू करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। बीएनएसएस की धाराओं के मुख्य बिंदु : सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं, वहीं अब बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) में 531 धाराएं हैं। पूर्व में प्रथम सूचना रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 154 के तहत अंकित की जाती थी जो कि अब बीएनएसएस की धारा 173 के तहत अंकित की जाएगी। बीएनएसएस की धारा 105 के तहत अनुसंधान के दौरान बरामदगी के समय वीडियोग्राफी की जानी आवश्यक होगी। बीएनएसएस की धारा 176 (3) के तहत 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की ओर से घटनास्थल का निरीक्षण अनिवार्य होगा। नए प्रावधान बीएनएसएस के अनुसार अब कोई भी बलात्कार पीड़िता अपने बयान मोबाइल फोन सहित किसी भी अन्य ऑडियो या विडियो इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से भी अंकित करा सकती है।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में जहां 511 धाराएं थी, वहीं अब बीएनएस में 358 धाराएं हैं, जिनको 20 अध्याय में विभाजित किया गया है। 33 अपराधों में सजा की अवधि बढ़ाई गई है। 83 अपराधों में जुर्माने की राशि बढ़ाई है और 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है। बीएनएस के माध्यम से सजा के एक नए तरीके के तौर पर सामुदायिक सेवा को जोड़ा गया है तथा 6 अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान रखा गया है।्