रेवाड़ी। होली हो या फिर दीपावली का त्योहार खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में इस बार होली के त्योहार से पहले ही जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम सख्त नजर आ रही है। विभाग अब शहर के बड़े प्रतिष्ठानों से मिठाइयों व अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल भर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन 25 से अधिक सैंपल भर चुका है। विभाग की टीम ने सोमवार को दुकानदारों को मिलावट नहीं करने की चेतावनी दी तथा लोगों को जागरूक किया।
टीम की आरे से पिछले एक साल में 200 से अधिक खाद्य पदार्थों के नमूने लिए थे, जिनमें से 65 की रिपोर्ट फेल मिली है। इसमें दूध, खोया, पनीर, सॉस व आईसक्रीम शामिल हैं। सैंपल फेल होने पर 12 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। कई की अभी रिपोर्ट प्रयोगशाला में लंबित है। हालांकि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया हुआ है। बावजूद इसके मिलावटखोर बाज नहीं आ रहे हैं। विभाग की टीम ने जनवरी 2022 से जनवरी 2023 तक जिले भर की खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानों पर 300 से अधिक छापा मारकर की थी।
सजा वाले 35 मामले कोर्ट में विचाराधीन टीम की ओर से सैंपलों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। इनमें सब स्टैंडर्ड, अनसेफ व लेवल शामिल है। सबस्टैंड यानि गुणवत्ता की कमी पाई जाने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा अनसेफ यानि जीवन के लिए हानिकारक पाए जाने पर एक साल की सजा व पांच लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। वहीं लेवल यानि किसी ब्रांडेड कंपनी की पैकिंग, न्यूट्रीशियन की मात्रा कम होना आदि पाए जाने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। रेवाड़ी जिला में अनसेफ पाए जाने वाले यानि सजा होने वाले 35 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, जबकि अभी तक पांच लोगों को सजा कराई जा चुकी हैं।
होली से पहले आएगी रिपोर्ट
जिला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी का कहना है कि जिले में सैंपल जांच सुविधा नहीं होने के चलते जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। इसका लाभ मिलावटखोर उठाते हैं। इस बार सरकार भी मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त है। जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जा रहे हैं, उनकी जांच रिपोर्ट होली से पहले ही आने की संभावना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावटखोरों के खिलाफ होली से पहले कार्रवाई करने में आसानी रहेगी।
सात साल के लिए जा सकते हैं जेल
विभाग के अनुसार प्रीवेंशन ऑफ फूड आल्ट्रेशन एक्ट-1954 के तहत मिलावटखोरों पर जुर्माने के साथ सात साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि एक्ट में इसे विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। यदि कोई खाद्य पदार्थ बिना लाइसेंस के पैक कर बेचा जा रहा है तो बेचने वाले पर तीन लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि कोई खाद्य पदार्थ का सैंपल जांच के दौरान तय मानकों के अनुसार नहीं पाया जाता है तो बेचने वाले के खिलाफ पांच लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ अर्थात खाने के लिए अयोग्य पाया जाता है तो मिलावटखोर को सात साल तक सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है।
इन पर लगाया जा चुका है जुर्माना
क्र.नाम-जुर्माना
1. अमूल दुग्ध सागर डेयरी धारूहेड़ा - 1.5 लाख
2. एजी फूड प्रोडक्ट रेवाड़ी - 1 लाख
3. छाबड़ी डेयरी बावल, घटिया पनीर के लिए 1.5 लाख
4. घटिया खोया के लिए, पवन डेयरी बावल -1 लाख
5. घटिया आइसक्रीम के लिए, क्वीन बेल आइसक्रीम रेवाड़ी - 1 लाख
6. घटिया आइसक्रीम के लिए, ओपी मिल्क डेयरी बावल 75 हजार
7. घटिया पनीर के लिए, एआर मिल्क फूड धारूहेड़ा 50 हजार
8. घटिया पनीर के लिए, ओम बीकानेर धारूहेड़ा 50 हजार
9. घटिया पनीर के लिए, ओम स्वीट्स एन रेस्टोरेंट रेवाड़ी- 1 लाख
10. घटिया घी के लिए, जगदंबा स्टोर रेवाड़ी 50 हजार
11. जेएमके इंटरप्राइजेज झज्जर, रेवाड़ी में बिकी घटिया चटनी के लिए 1 लाख
12. एमएन ऑयल मिल रेवाड़ी - 60 हजार
13.गलत ब्रांडेड दाल पैक के लिए, गायत्री मॉल धारूहेड़ा20 हजार
14. घटिया पनीर के लिए, जोधपुर स्वीट्स धारूहेड़ा- 50 हजार।
15. डहीना रिटेलर एंटरप्राइज - 20 हजार
16. घटिया मैदा के लिए, 5 बेकरियों पर 15 हजार का जुर्माना
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खाद्य पदार्थों में मिलावट को परखने के कुछ खास तरीके
1 लाल मिर्च में मिलावट के तौर पर ईंट का बारीक पिसा हुआ पाउडर प्रयोग किया जाता है, जिसमें कृत्रिम रंग भी मिला हुआ होता है। इसमें मिलावट की जांच के लिए पानी में डालकर देखा जा सकता है। अगर लाल मिर्च पाउडर पानी में तैरता नजर आए तो वह शुद्ध है, लेकिन यदि वह डूब जाए तो आप समझ लीजिए कि वह मिलावटी है।
2 बाजार में मिलने वाला हल्दी पाउडर भी मिलावटी हो सकता है। इसमें मेटानिल येलो नामक रसायन मौजूद होता है, जो आपको कैंसर जैसी बीमारी का शिकार बना सकता है। इसे परखने के लिए हल्दी पाउडर में कुछ बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड और उतनी बूंदे पानी की डालकर देखें। अगर हल्दी का रंग गुलाबी या बैंगनी हो जाए, यदि आप इस तरह से पेपिलोमा पाते हैं, तो सावधान रहें!
3. गरम मसालों में प्रयोग होने वाली दालचीनी भी कई बार मिलावटी होती है। चूंकि इसमें कोई फर्क नहीं कर पाता, इसे पैकेज में डालकर आसानी से किसी को भी गुमराह किया जा सकता है। दालचीनी में मिलावट के तौर पर अमरूद की छाल मिलाई जाती है। इसकी पहचान करने के लिए इसे हाथ पर रगड़कर देखें, अगर आपको इसका रंग नजर आए, तो यह असली है, अन्यथा नकली।
4. दूध और मावे के साथ अन्य डेयरी उत्पादों में भी मिलावट होती है। मावे की जांच के लिए सैंपल लेकर टेस्ट ट्यूब में भरें और उसमें 20 एमएल पानी डाल कर उबालें। ठंडा होने पर इसमें दो बूंद आयोडीन डालें। अगर सैंपल का रंग नीला हो जाए तो इसमें स्टार्च मिला हुआ है।
5 दूध में पानी की मिलावट को परखने के लिए किसी चिकनी सतह पर दूध की कुछ बूंदें गिराएं। अगर यह बूंदें बगैर निशान छोड़े तेजी से आगे बह जाए, तो इसमें पानी मिला हुआ है। वहीं दूध अगर शुद्ध होगा तो वह धीरे-धीरे बहेगा और सफेद धब्बा छोड़ जाएगा।
वर्जन
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से मिलावटखोरी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। त्योहार के मद्देनजर सैंपलिंग तेज कर दी है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों को जुर्माना लगवाया गया है। करीब 35 मामले कोर्ट में विचाराधीन है, जिनमें सजा का प्रावधान है। लोगों को खाद्य पदार्थ लेने से पहले उसकी परख जरूर करनी चाहिए।
-डॉ दीपक चौधरी, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रेवाड़ी