संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई के लिए बुधवार को आखिरी दिन तीन हजार से ज्यादा किसान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में बीमा कंपनी के दफ्तर में पहुंचे। बीमा कंपनी की ओर से लगाए गए तीन काउंटरों पर किसानों की दोपहर तक लंबी कतारें लगी रहीं। बता दें कि बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को 60 फीसदी नुकसान का अनुमान है। इस बार जिले में 75 हजार हेक्टेयर में सरसों और 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई की गई है।
बुधवार तक कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे क्षतिपूर्ति पोर्टल पर 377 गांवों के 3 हजार 144 किसान 13 हजार 918 एकड़ जमीन की शिकायत करा चुके हैं। ऐसे किसान जिन्होंने अपनी फसल का बीमा नहीं कराया है, उनको भी सरकार द्वारा नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, जिन किसानों ने अपनी जितनी जमीन का बीमा कराया हुआ है, उसमें हुए नुकसान का मुआवजा बीमा कंपनी द्वारा दिया जाएगा और उसी किसान की बची हुई जमीन जिसका बीमा नहीं हो रहा, लेकिन ओलावृष्टि की चपेट में आने से फसल को नुकसान हुआ है। ऐसी फसल का मुआवजा सरकार द्वारा दिया जाएगा।
इन फसलों का मिलेगा मुआवजा
कृषि अधिकारियों ने बताया कि किसानों को बीमा कंपनी द्वारा गेहूं, सरसों, जौ, चना और सूरजमुखी फसलों का मुआवजा दिया जाएगा। खराब हुई फसल के लिए किसानों द्वारा जमा कराया गया फार्म सर्वप्रथम कंपनी के अधिकारियों के पास ब्रांच में भेजा जाएगा, जहां फार्म में दर्ज फसल के विवरण की जांच की जाएगी। जिन फॉर्मों में किसी प्रकार की कमी मिलेगी उन किसानों को बीमा कंपनी द्वारा सूचित किया जाएगा। उसके बाद कृषि अधिकारियों की देखरेख में सभी किसानों की फसलों की जांच की जाएगी। फिर किसानों को बीमा कंपनी द्वारा मुआवजे का भुगतान किया जाएगा।
तीन दिन में तीन हजार से ज्यादा बीमा कराने वाले किसानों के आवेदन आ चुके हैं। जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा नहीं करवा रखा, उन किसानों को खराब हुई फसल का मुआवजा सरकार द्वारा दिया जाएगा। जिसके लिए विभाग द्वारा ऑनलाइन माध्यम में क्षतिपूर्ति पॉर्टल की सुविधा की गई है।
- संजय सिंह, कृषि विकास अधिकारी, रेवाड़ी।