रेवाड़ी। शहर की नई अनाज मंडी में अब किसान सरसों लेकर आने लगे हैं, लेकिन मार्केट कमेटी की तरफ से किसानों के लिए अभी किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है। पीने के लिए न तो पानी की व्यवस्था है और न ही शौचालय की साफ सफाई की गई है। ऐसे में जो किसान ग्रामीण क्षेत्रों से मंडी में पैदावार बेचने के लिए पहुंच रहे हैं उन्हें पानी तक भी नसीब नहीं हो पा रहा है। जबकि कुछ समय बाद सरकारी खरीद भी शुरू हो जाएगी।
दूसरी तरफ मार्केट कमेटी का दावा था कि वाटर कूलर, शौचालय और स्ट्रीट लाइटों सहित अन्य जरूरी व्यवस्था की जा रही है। अनाज मंडी के तीनों फड़ों और मुख्य सड़कों की सफाई की जा रही है। जबकि पड़ताल में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया है। साथ ही अनाज मंडी में दुकानों के पिछले हिस्से में सड़क और ग्रीन बेल्ट पर जमा पानी और गंदगी की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे आगामी दिनों में सरसों की आवक बढ़ने से किसानों और आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आवक बढ़ने पर आढ़तियों की ओर से दुकानों के पिछले हिस्से में भी सरसों डाली जाती है।
500 से 600 रुपये कम मिल रहा दाम
सरसों में अभी 25 प्रतिशत तक नमी आ रही है। अनाज मंडी में आ रही सरसों को किसानों व व्यापारियों की ओर से फड़ पर सुखाया जा रहा है। अनाज मंडी में अब तक 10 हजार कट्टे सरसों आ चुकी है। सरसों में नमी होने के कारण किसानों को अभी 4800 से 5200 प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं। सरसों के प्रति क्विंटल 500 से 600 रुपये कम मिल रहा है। पिछले सीजन में रेवाड़ी, कोसली और बावल की अनाज मंडियों में करीब साढ़े 5 लाख क्विंटल से अधिक सरसों की सरकारी व प्राइवेट खरीद की गई थी। जिले में इस सीजन में करीब 75000 हेक्टेयर में सरसों की बुआई की गई थी। मंडी में फसल बेचने के लिए पहुंचे गांव छुरियावास के किसान चंदूलाल ने बताया कि सरसों तो लेकर आया, लेकिन वह रेट नहीं मिल पाया जितना चाहता था। रेट काफी कम मिल रहा है। भाड़ावास निवासी भंवर दास ने बताया कि सरसों काफी अच्छी थी। इसके बावजूद रेट नहीं मिल रहा है। जबकि रेट कम से कम 5400 रुपये होना चाहिए।
वर्नन
मंडी में व्यवस्थाओं को अभी दुरुस्त करवाया जा रहा है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -नरेंद्र यादव, सचिव, मार्केट कमेटी