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Rewari News: हर माह 25 प्रेमी जोड़े पुलिस सुरक्षा के लिए कर रहे आवेदन

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रेवाड़ी। रेवाड़ी स्थित जिला न्यायालय। संवाद
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रेवाड़ी। जिले में लगातार प्रेम विवाह करने वालों की संख्या बढ़ रही है। प्रेम विवाह करने वाले जोड़े जिला न्यायालय में आकर पुलिस सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं। अब इनकी संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई है। प्रतिमाह 25 से 30 प्रेमी जोड़े पुलिस सुरक्षा के लिए आवेदन कर रहे हैं। इससे पहले 10 से 15 आवेदन आते थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से जिले के अलावा पड़ोसी प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रेमी जोड़े भी पुलिस सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं। इससे आवेदन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह सभी आवेदन उन्हीं मामलों में किया जा रहे हैं, जहां प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवतियों को अपने परिजनों से जानमाल की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है। इन मामलों का शीघ्र निपटारा करना भी न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है। न्यायिक कर्मचारी बताते हैं कि लगातार आ रहे आवेदन से न केवल न्यायिक अधिकारी परेशान हैं बल्कि आए दिन कोर्ट में परिजनों के आवागमन से पुलिसकर्मी भी खासे परेशान नजर आते हैं। अकसर मामलों में लड़की द्वारा अपने परिजनों की इच्छा के विरुद्ध शादी करने को लेकर काफी तनावपूर्ण स्थिति अदालत में बनी रहती है। कई मामलों में अदालत में लड़की को देखकर उसके परिजन बेहोश तक हो गए और उन्हें प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करानी पड़ी है। इसके अलावा अपनी शादी को अदालत से सत्यापित करवाने के लिए भी लगातार पुलिस सुरक्षा के लिए आवेदन किया जा रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसा करने से अदालत में एक दस्तावेज तैयार हो जाता है कि दोनों पक्षकारों ने आपस में सहमति से अपना विवाह कर लिया है। इसके बाद दोनों पक्षकार अपने विवाह को कहीं भी पंजीकृत भी कर सकते हैं।
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क्या है पुलिस सुरक्षा लेने का नियम

अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह करने वाले युगल अपना दांपत्य जीवन में प्रवेश करने से पहले स्वयं को सुरक्षित करने के लिए अदालत की शरण लेते हैं। इसके लिए दोनों पक्ष अधिकांश मामलों में पहले आर्य समाज मंदिर में शादी करता है। उसके बाद वहां से उसका प्रमाण पत्र प्राप्त कर अपने आयु के प्रमाण पत्र व रिहायशी प्रमाण पत्र के साथ किसी भी जिला न्यायालय में जाकर परिजनों से सुरक्षा की गुहार लगाता है। इस प्रकार के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार ऐसे युगल को सुरक्षा प्रदान करना प्रशासन का दायित्व है। न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सबसे पहले दोनों पक्ष के परिजनों को कोर्ट सम्मन भेजता है और कोर्ट में पेश होने के बाद परिजन कोई एतराज न करें इस प्रकार की हिदायत भी कोर्ट के द्वारा दी जाती है। कोर्ट में परिजनों के आने तक सेफ हाउस में युवक युवती रहते हैं।

पुलिस सुरक्षा कार्रवाई में 5 से 6 दिन का लगता है समय

यहां उल्लेखनीय है कि सुरक्षा मांगने से लेकर परिजनों के कोर्ट में बयान लिखने तक एक महिला और एक पुरुष पुलिसकर्मी प्रेमी जोड़े की सुरक्षा में तात्पर्य रहता है। पुलिस सुरक्षा की इस कार्रवाई में सामान्यतः 5 से 6 दिन का समय लगता है। इस दौरान दोनों ही पक्षकारों की सुरक्षा का जिम्मा जिला पुलिस का होता है।
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