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Rewari News: 3.41 करोड़ खर्च के बाद भी मरीजों काे नहीं मर्ज से राहत

Thu, 17 Aug 2023 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी का नागरिक अस्पताल। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। शहर के नागरिक अस्पताल में किडनी की पथरी के इलाज के लिए चार साल पहले मिली लिथोट्रिप्सी मशीन पिछले दो साल से खराब पड़ी है। इसके चलते अस्पताल में किडनी में पथरी के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। पीड़ितों को निजी अस्पतालों में महंगा उपचार कराना पड़ रहा है। यहां पथरी के साइज के हिसाब से ऑपरेशन के लिए अनुमानित 30-40 हजार या इससे भी ज्यादा रुपये वसूले जाते हैं।
दिसंबर 2019 में नागरिक अस्पताल को 3 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत वाली फ्रांस निर्मित लिथोट्रिप्सी मशीन मिली थी, जिसे लगाने के लिए फ्रांस से टीम रेवाड़ी अस्पताल में पहुंची थी। टीम ने सर्जन को मशीन के बारे में जानकारी भी दी थी। इसके फंक्शन के बारे में भी बताया था। बेहतर तकनीक के साथ बिना चीर-फाड़ के किडनी की पथरी का इलाज करने को अस्पताल में यह मशीन लगाई गई थी, उम्मीद थी कि मरीजों का दर्द कम होगा, मगर लचर सरकारी सिस्टम ने मरीजों की पीड़ा बढ़ाई हुई है।
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30 एमएम तक की पथरी निकालने की क्षमता
इस मशीन से किडनी स्टोन के मरीजों का बिना चीर फाड़ के ऑपरेशन किया जाता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है। इसमें मरीजों को भी दिक्कत नहीं उठानी पड़ती है। बाहर अगर किडनी की पथरी का ऑपरेशन कराते हैं तो खर्च भी महंगा पड़ता है, लेकिन सरकारी अस्पताल में इस मशीन से यह निशुल्क होता है।
पथरी को तोड़कर करती है बाहर
इसमें किडनी की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। इन ध्वनि तरंगों को हाई एनर्जी शेक वेव या तरंग भी कहा जाता है। हाई एनर्जी शॉक वेव्स का उपयोग करके बिना सर्जरी के पथरी को ‘पथरी की धूल’ या छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, जो पेशाब के रास्ते आसानी से बाहर निकल जाते हैं। यदि बड़े टुकड़े बचे रहते हैं तो एक उपचार और किया जाता है। यह तकनीक बिना चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है, जिसका मतलब है कि इसमें सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। लेजर लिथोट्रिप्सी में किडनी की पथरी को तोड़ने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है।
यूरो सर्जन की जरूरत, मगर जनरल सर्जन भी सक्षम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लिथोट्रिप्सी मशीन का संचालन यूरो सर्जन द्वारा ही किया जाता है, जोकि किडनी में पथरी का इलाज करते हैं। रेवाड़ी में नागरिक अस्पताल में यह पद रिक्त है। इससे साढ़े तीन करोड़ की मशीन लगने के बाद भी फायदा नहीं मिल पा रहा। सामान्य परिस्थितियों में जनरल सर्जन भी इस मशीन से इलाज कर सकते हैं, मगर इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग (कोर्स) की जरूरत होती है। रेवाड़ी में इस समय दो सामान्य सर्जन हैं। विभाग द्वारा लंबे समय से न तो करोड़ों की मशीन के बेकार होने की चिंता की गई है और न ही किडनी स्टोन के मरीजों के स्वास्थ्य की।
हर महीने 150-200 मरीज, मगर कर दिए जाते हैं रेफर
किडनी में स्टोन (पथरी) के नागरिक अस्पताल की सर्जरी ओपीडी में हर माह 150-200 मरीज आते हैं। इसमें बड़ी संख्या उनकी होती है, जिन्हें ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। नागरिक अस्पताल में यह मशीन लगने के कुछ दिन तो मशीन की सहायता से ऑपरेशन किए गए, लेकिन अब करीब दो साल से मशीन खराब पड़ी है। इससे ऑपरेशन भी नहीं हो रहे हैं। जो भी मरीज किडनी में स्टोन की शिकायत लेकर आ रहे हैं, उनको रेफर ही किया जा रहा है। मरीजों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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मशीन के जो पार्ट्स खराब हैं, जल्द कराएंगे ठीक : पीएमओ
यह मामला संज्ञान में है। अस्पताल में लगी लिथोट्रिप्सी मशीन खराब है। मशीन को ठीक कराने की जल्द कोशिश की जाएगी। मशीन ठीक होते ही ऑपरेशन भी शुरू कर दिए जाएंगे। अभी फिलहाल अस्पताल के सर्जरी विभाग में हर्निया, अपेंडिक्स व शिष्ट के ऑपरेशन हो रहे हैं।
-डॉ. अशोक, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी।
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