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चुनाव : नगर नागरिक और नजर

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मनोज वशिष्ठ
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फोटो : 24
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यह भूमि नहीं केवल माटी, यह पुरखों का वरदान है,
रेवाड़ी और धारूहेड़ा, हमारी संस्कृति की शान है।
वीर अहीरवाल का मस्तक, सदा गर्व का जोश रहा,
इतिहास के हर पन्ने पर, इसका ही जय-घोष रहा।
आज समय ने फिर पुकारा, अपना फर्ज निभाने को,
उठो नागरिक! संकल्प लो, शहर का भाग्य बनाने को।

सादगी ही गहना हमारा, सादगी ही पहचान है,
बिना दिखावे के जो सेवा करे, वही सच्चा इंसान है।
प्रलोभन की हर डगर को, आज ठोकर मार दो,
अपने एक पवित्र वोट से, शहर का रूप संवार दो।
राष्ट्रभक्ति की अलख जगाओ, भीतर के इस द्वंद्व में,
सच्चा सेवक वही जो खड़ा हो, जनता के अनुबंध में।

गढ़ीमन की लेखनी कहती, यह चुनाव नहीं एक यज्ञ है,
हर नागरिक की आहुति ही, यहाँ सबसे ज्यादा विज्ञ है।
न राग हो, न द्वेष हो, बस राष्ट्र-धर्म का ध्यान रहे,
लोकतंत्र की इस वेदी पर, शहर का ही सम्मान रहे।
जागो! कि अब सूरज की, नई किरण खिलानी है,
रेवाड़ी-धारूहेड़ा की, सुथरी छवि फिर लानी है।
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मनोज वशिष्ठ, शिक्षाविद साहित्यकार, विकास नगर
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