रेवाड़ी। जिले में दो खेमे में बंटी भाजपा में जिला परिषद और ब्लॉक समिति प्रधानगी की चौधराहट को लेकर चल रही खींचतान में अब दो खेेमे खुलकर सामने आ गए हैं। नाहड़ ब्लॉक में सहकारिता राज्य मंत्री के खेमे की चेयरपर्सन बनने के बाद भाजपा प्रवक्ता के खेमे ने चुनाव पर सवाल उठाए है। मामला डीसी के बाद राज्य चुनाव आयुक्त तक पहुंच गया है।
आयुक्त ने इस पर संज्ञान लेते हुए डीसी व डीडीपीओ से रिपोर्ट मांगी है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वीर कुमार यादव, नाहड़ मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार और मंडल महामंत्री ने चुनाव आयुक्त को पत्र भेजकर नाहड़ पंचायत समिति की चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता की बात कही है।
पत्र में लिखा गया है कि चुनाव में नियमों को उल्लंघन हुआ है। पत्र के अनुसार घोषित कार्यक्रम के अनुसार 11 बजे ब्लॉक कार्यालय में पहुंचने की जानकारी दी गई थी लेकिन कुल 23 सदस्यों में 20 सदस्य एक बजकर 20 मिनट पर पहुंचे और दो सदस्य एक बजकर 25 मिनट पर। एक सदस्य आशाबाई एक बजकर 30 मिनट पर पहुंची और उसे संबंधित अधिकारी ने वोट भी नहीं डालने दिया।
इस पर सवाल उठाया गया कि जब दो घंटे देरी से पहुंचने वालों को प्रक्रिया में शामिल किया गया तो उसके पांच मिनट देरी से आने वाले को क्यों वंचित रखा गया। मंत्री पर भी सवाल उठाया है। पत्र में लिखा गया है कि प्रक्रिया में एमलए, एमपी और मंत्री भाग ले नहीं सकते। जबकि नाहड़ ब्लॉक की चुनाव प्रक्रिया में मंत्री, उनकी पत्नी और समर्थक अंदर ही थे। अधिकारियों पर भी आरोप जड़े हैं। भाजपा नेताओं ने मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान डीसी और चुनाव अधिकारी से भी शिकायत की गई लेकिन कोई कदम नहीं उठाया।
पार्षद ने कहा, अधिकारी ने मीटिंग से किया बाहर
वार्ड नंबर-10 से पार्षद आशा बाई ने उपायुक्त डॉ यश गर्ग को लिखे पत्र में चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। पत्र में लिखा गया है कि उसे एक नेता के कहने पर मीटिंग से बाहर किया गया। वह अन्य सदस्यों से मात्र पांच मिनट ही देरी से पहुंची थी। उसे मतदान और चुनावी प्रक्रिया से वंचित किया गया। उस वक्त वहां मंत्री और उनकी पत्नी भी बैठे हुए थे। उसे प्रक्रिया से बाहर रखा गया। इसलिए मामले की उच्च स्तर पर जांच कराकर चुनाव को रद कराया जाए।
यह है मामला
नाहड़ ब्लॉक में नौ मार्च को चेयरपर्सन और वाइस चेयरपर्सन के चुनाव हुए थे। इसमें कुछ पार्षदों को देरी से आने की बात कहते हुए चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। इस चुनाव में सहकारिता राज्य मंत्री बिक्रम सिंह और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता वीर कुमार यादव ने भी पूरी दिलचस्पी ली। मंत्री के खेमे की पार्षद चेयरपर्सन भी सर्व सम्मति से चुन ली गई। लेकिन यादव के पास पहुंचे कुछ पार्षदों ने उनसे चुनाव प्रक्रिया में शामिल न होने देने की शिकायत की तो उन्होंने मामला चुनाव आयुक्त तक पहुंचाया।
मंत्री आए थे लेकिन चुनाव प्रक्रिया के वक्त वे बाहर थे
आरओ एवं एसडीएम निर्मल नागर से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि 11 बजे के लिए सभी को सूचना दी गई थी। एक से सवा एक बजे के बीच 22 सदस्य आए थे। उनके साथ मंत्री और उनकी पत्नी भी थी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर उन्हें बाहर भेज दिया था। इसके बाद सदस्यों ने सुमन देवी को सर्व सम्मति से चेयरपर्सन चुना और फिर वाइस चेयरमैन के लिए दो उम्मीदवार थे तो वोटिंग शुरू कराई। पार्षद आशा बाई करीब पौने दो बजे पहुंची लेकिन तब आखिरी वोट डाला जा रहा था, इसलिए उन्हें प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।
वर्जन...
हमने चुनाव की तारीख तय की थी। पूरा मामला डीसी और डीडीपीओ देख रहे हैं। मामले की शिकायत मुझे मिल गई है। डीसी से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।
राजीव शर्मा, चुनाव आयुक्त