रेवाड़ी। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए जनवरी 2018 में रेवाड़ी के गांव गोकलगढ़ से लेकर रेवाड़ी नारनौल रोड स्थित हरिनगर तक करीब 4.2 किलोमीटर लंबे बाईपास का शिलान्यास तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री रहे राव नरबीर सिंह ने किया था। वर्ष 2020 तक निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन आज तक नहीं हो पाया। बाईपास पर 3 रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा किया जाना था, इसमें से दो रेलवे ओवरब्रिज का ही निर्माण कार्य पूरा हो सका। रेवाड़ी-नारनौल रींगस रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका। यदि निर्माण कार्य समय से पूरा हो गया होता तो शायद आज 2 परिवारों में मातम नहीं छाया होता, क्योंकि अधूरे ओवरब्रिज के चलते ही यह बड़ा हादसा हुआ है।
लोक निर्माण अधिकारियों ने साधी चुप्पी, कार्यालय छोड़कर भागे कंपनी के अधिकारी
जिस फ्लाईओवर से गिरकर बहादुर सिंह व सुंदर सिंह की मौत हुई है, महज 200 मीटर की दूरी पर बाईपास निर्माण कार्य कर रही निर्माण कंपनी का दफ्तर भी है, यहीं पर जीएम स्तर के अधिकारी बैठते हैं। वहीं हादसे के बाद पीड़ित परिवार को ढांढस देने की बजाय अधिकारी दफ्तर छोड़कर भाग चुके हैं।
निगरानी होती तो शायद बच जाती दोनों की जिंदगी
हादसे के बाद निर्माण कंपनी के कर्मचारी फ्लाईओवर का रास्ता बंद करने के लिए पत्थर व मिट्टी डालकर बंद करने में जुट गए। यदि निर्माण कंपनी के अधिकारी पहले से इन अवरोधों को डाल देते तो शायद आज बहादुर सिंह में सुंदर सिंह अपने परिवार के साथ मौजूद होते। कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से कराया जा रहा है, ऐसे निगरानी का जिम्मा भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर था, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी निगरानी में फेल होते हुए दिखाई दिए।