संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले का लिंगानुपात आज बेहतर स्थिति में हैं। इसे बरकरार रखते हुए और सुधार करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग कुछ नए कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इसके तहत हस्ताक्षर अभियान चलाकर एक ओर जहां आमजन में बेटा बेटी में किसी प्रकार का कोई भेद नहीं होने का अहसास करा रहे हैं वहीं दूसरी ओर कन्या भ्रूण जांच करने और इसे बढ़ावा देने वालों की पहचान करने के लिए सख्त कदम उठाने का दावा किया जा रहा है। वर्तमान में जिले का लिंगानुपात एक हजार लड़कों पर 913 लड़कियां हैं।
अधिकारी आकड़ों के लिहाज से यह संतोषजनक स्थिति मान रहे हैं। इस वर्ष के प्रारंभ में जनवरी माह में भी जिले का लिंगानुपात 918 के साथ प्रदेश में दसवें स्थान पर थे। उपसिविल सर्जन एवं पीएनडीटी नोडल अधिकारी डा. भंवर सिंह का कहना है कि आजकल अधिकांश दंपती पहली संतान के बाद ही परिवार नियोजन का आपरेशन करा लेते हैं। इसमें पहली संतान बेटा या बेटी कोई भी हो सकती है। इसके अलावा उन लोगों पर थोड़ा ध्यान देने का प्रयास किया जा रहा है जो पहली संतान होने के बाद दूसरी संतान का किसी न किसी कारण से गर्भपात करा रहे हैं या हो रहा है। इसलिए एक ओर जागरूकता अभियान से तो दूसरी ओर एमटीपी किट बेचने वालों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की मानीटरिंग पर ध्यान दे रहे हैं।
हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निगरानी करने के साथ लोगों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देते हुए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ही करीब एक हजार लोगों ने बेटा बेटी एक समान का संदेश देते हुए हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया। इसी प्रकार के कार्यक्रम विकसित भारत संकल्प यात्रा में भी चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आमजन से भी गर्भपात प्कराने वालों और एमटीपी किट बेचने वालों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को मुहैया कराने की अपील की जा रही है। इससे एक ओर मनमर्जी से एमटीपी किट बेचने वालों के बारे में जानकारी मिलेगी।
एमटीपी किट की भी हो रही माॅनिटरिंग
जागरूकता अभियान के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम मेडिकल स्टोर्स में औचक निरीक्षण कर एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रिग्नेंसी) किट की बिक्री का रिकार्ड जांच रहे हैं। पिछले दो माह के दौरान 29 मेडिकल स्टोर्स का रिकार्ड देख चुके हैं। जिले में मेडिकल स्टोर संचालक को एमटीपी किट बेचने की अनुमति नहीं है। जो अधिकृत मेडिकल स्टोर संचालक एमटीपी किट बेच रहे हैं उनसे किट खरीदने वालों के परिवार का विवरण भी ले रहे हैं। किन परिस्थितियों में एमटीपी किट की आवश्यकता पड़ी, किस विशेषज्ञ की सिफारिश पर एमटीपी किट खरीदी गई। जिस मरीज के लिए यह किट ली गई है उसकी पहली संतान है या नहीं, कितने सप्ताह का गर्भ है आदि पहलुओं को भी जांचा जा रहा है।