संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में डेंगू पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे के अंदर जिले में डेंगू के चार मरीजों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या 331 हो गई है।
जिले के सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी अस्पतालों में इन दिनों वायरल से पीड़ित मरीजों का तांता लगा हुआ है। डेंगू के साथ वायरल बुखार से भी लोग पीड़ित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को 67 संदिग्धों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें 4 मरीजों में डेंगू होने की पुष्टि हुई है।
उधर, डेंगू के बढ़ते केस देखकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की ओर शहर में फीवर मास सर्वे के लिए टीमें गठित की गई है। यह टीमें घर-घर जाकर गमले, फ्रिज की ट्रे, कूलर सहित अन्य स्थानों पर लार्वा की जांच कर रही है। जहां पर लार्वा मिल रहा है, वहां लोगों को नोटिस भी दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार फॉगिंग करा रहे हैं। हालात यह है कि इस बार डेंगू के केस तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे पिछले कई सालों का रिकॉर्ड भी टूट गया है।
2021 व 2022 में डेंगू के 300 से ज्यादा केस मिले थे
वर्ष 2021 व 2022 में जिले में डेंगू के 300 से ज्यादा केस मिले थे, जिससे हालात खराब हो गए थे, परंतु इस बार डेंगू ने सर्वाधिक आंकड़ा भी पार कर लिया है। विशेषज्ञों ने बताया कि डेंगू के सामान्य लक्षणों में सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी, आंखों के पीछे दर्द और त्वचा पर लाल चकत्ते होना मुख्य हैं। हेल्थ इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जहां भी केस मिल रहे हैं, वहां आसपास के घरों में भी फाॅगिंग की जा रही है और लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
दो साल से लगातार बढ़ रहे केस
डेंगू के आंकड़े भी बता रहे हैं कि दो साल से लगातार डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। वर्ष 2021 में 306 केस मिले थे, जबकि वर्ष 2022 में इनकी संख्या बढ़कर 324 हो गई। इस बार अक्तूबर में ही आंकड़ा 331 के करीब पहुंच चुका है। अभी दो माह और बाकी है, यानी अक्तूबर और नवंबर तक डेंगू का असर रहता है।
जिले में डेंगू के केस बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। जांच के बाद चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही अपना इलाज कराएं। डेंगू होने की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं पड़ती है।
- डॉ. अमित यादव, डिप्टी सिविल सर्जन, रेवाड़ी।