संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। दो दिन पहले हुई बारिश से गेहूं और सरसों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। गेहूं के दाने काले पड़ने को लेकर किसान परेशान हैं। जो फसल बची भी थी वह वीरवार रात और शुक्रवार सुबह तेज हवा के साथ फिर से बारिश से बर्बाद हो गई। शुक्रवार की शाम 17 गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई जिससे गेहूं और सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
दो दिन तक हुई बारिश से परेशान किसान अभी उबर भी नहीं पाए थे कि वीरवार की रात और शुक्रवार की सुबह तेज हवा के साथ बारिश हुई जिससे गेहूं और सरसों की बची खुची फसल भी गिर गई। इससे किसानों को काफी नुकसान की आशंका है। शुक्रवार की शाम साढे पांच बजे शहर के अलावा जिले के नांगलमूंदी, चोकी नंबर दो, देहलावास, गुलाबपुरा, बोडिया कमालपुर,भटेडा, खोल, खोरी, कुंड, माजरा, मनेठी, जाटूवास, भाड़ावास, खरसानकी, कमालपुर, करनावास व हरिनगर आदि गांवों में दो मिनट तक ओलावृष्टि हुई है। किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से रबि की फसल बुरी तरह से चौपट हो गई है। किसान किशन चंद, बच्चूसिंह, भीमसिंह, प्रकाश चंद आदि का कहना है कि पक कर तैयार हो चुकी गेहूं व सरसों की फसल को जब काटने की बारी आई तो बारिश और ओले का कहर टूट पड़ा। खेत में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई और बाली काली पड़ने लगी है। इससे गेहूं का पैदावार कम हो सकता है। भूसा भी काला होकर पशुओं को खिलाने के लायक नहीं जाएगा। प्रकृति के इस के प्रकोप से हो रहे नुकसान की भरपाई किसान नहीं कर पाएंगे। जिससे उनके सामने तमाम तरह की कठिनाइयां खड़ी होंगी। इसके अलावा बारिया से शहर से लेकर गांवों में जलभराव की स्थिति बन गई है। वाहन चालकों व पैदल चलने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्राकृतिक आपदा से बचने का विकल्प बीमा
प्राकृतिक आपदा में फसल नुकसान से बचने के लिए फसल बीमा किसानों के सामने एक अच्छा विकल्प है। कृषि विभाग इसके लिए तमाम माध्यमों से किसानों को जागरूक कर फसल का बीमा कराने के लिए कहता है। इसके बाद भी बीमा करने वाले किसानों की संख्या बहुत कम है। रबी फसल 2022-23 के सीजन में किसानों ने 75 हजार हेक्टेयर में सरसों व 38 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई है। इसमें से पांच हजार किसानों ने ही बीमा कराया है।
जो फसल गिर गई है, उसमें तो पैदावार प्रभावित हो सकती है। जो फसल खड़ी है, उसके पैदावार पर बारिश का कोई खास असर नहीं पड़ेगा। -डॉ. जेएस यादव कृषि वैज्ञानिक