पांच दशक पूर्व तक लहलहाने वाला दक्षिण हरियाणा आज सूखे की मार झेल रहा है। कहीं खारा पानी है तो कहीं मीठा पानी है तो जमीन के बहुत नीचे। हालात यह हो गई है कि दक्षिण हरियाणा के अधिकांश क्षेत्र आज सूखे की मार झेल रहे हैं। ऐसे में यदि राजस्थान से आने वाली नदियों का पानी फिर से दक्षिण हरियाणा में आने लगे तो यहां की धरती फिर से हरीभरी हो सकती है।
1 जनवरी 1966 से पूर्व तक संयुक्त पंजाब के समय राजस्थान और पंजाब में राजस्थान से निकलने वाली साबी, कृष्णावती और दोहान नदियों के लिए समझौता हुआ। इसमें इन नदियों पर बांध बनाकर पानी का आधा बंटवारा करने का निर्णय किया गया। कृष्णावती पर बांध बना भी लिया गया, लेकिन हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं दिया गया। इस संबंध में 1973 में दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक भी हुई। उसका भी कोई नतीजा नहीं निकल सका। अब सवाल यह है कि यदि इन तीनों नदियों का पानी फिर से हरियाणा में आने लगे तो हमारी प्यासी धरती फिर से सोना उगल सकती है।
डैम बनाकर रोका पानी
राजस्थान से साबी नदी में बाढ़ का पानी आता था। इससे पूरे रेवाड़ी, पटौदी, कोसली, दिल्ली के डाबा क्षेत्र से होता हुआ यमुना नदी में गिरता था। कृष्णावती से नांगली चौधरी, निजामपुर, नारनौल और डहीना का क्षेत्र प्रभावित होता था। वहीं दोहन के पानी से दोहन पच्चीसी के गांवों में पानी आता था। लेकिन इन तीनों नदियों पर बांध बनाने के बाद हरियाणा को इसका पानी मिलना बंद हो गया।
पहाड़ों से आता है पानी
तीनों नदियों में आना वाला यह बरसाती राजस्थान के पहाड़ों से आता था। इन नदियों से यह पानी राजस्थान से होकर दक्षिण हरियाणा में पहुंचता था। लेकिन जब यह पानी मिलना बंद हो गया तो दक्षिण हरियाणा में सूखे की स्थिति पैदा हो गई। अब सारे के सारे पानी का लाभ राजस्थान ही ले रहा है। वहीं प्राकृतिक संसाधनों को रोकना भी गैर कानूनी है।
विधानसभा में उठ सकता है मुद्दा
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से शनिवार को बावल में हुई सभा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने तीनों नदियों का पानी राजस्थान में दिलाने की मांग के बाद अब दक्षिण हरियाणा की राजनीति में भी भूचाल आ गया है। सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू होना है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा के विधायक अपने हिस्से का पानी राजस्थान से दिलाने की मांग करेंगे।
निकल सकता है समाधान
असल में राजस्थान का तर्क है कि उसे पंजाब से मिलने वाला पानी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अगर वह पानी पूरा मिलने लगे तो हरियाणा को भी अपने हिस्से का पानी मिल सकता है। इस संबंध में शीघ्र ही केंद्रीय मंत्री उमा भारती के नेतृत्व में बैठक हो सकती है। इससे पानी के बंटवारे का समाधान हो सकता है।
दक्षिण हरियाणा को अपने हिस्से का पानी चाहिए। हमारी जमीन प्यासी मर रही है। जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। हमने इस आवाज को उठा लिया है अब इसे दबने नहीं देंगे। हमारे हिस्से का पानी हम लेकर रहेंगे। - राव इंद्रजीत सिंह, केंद्रीय मंत्री