आरएसएस कार्यकर्ता के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के केस को झूठा बताते हुए शुक्रवार को आरएसएस, एबीवीपी, भारतीय मजदूर संघ और धर्मजागरण के कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय पर एक घंटे तक प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने 7 दिन में मामले की जांच पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। मौके पर पहुंचे उपायुक्त ने ज्ञापन लिया और निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।
प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय पर प्रदेश सरकार मुर्दाबाद के खूब नारे लगाए। इस दौरान धर्मजागरण के प्रांत समन्वय संयोजक, आरएसएस के जिला संघ चालक अजय मित्तल और जिला कार्यवाहक डा. लक्ष्मी नारायण के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से रोहड़ाई एसएचओ और नागरिक अस्पताल के एक बाल चिकित्सक को सस्पेंड करने की मांग रखी। प्रदर्शनकारी गांव गादला में 22 अक्तूबर को हुए विवाद में आरएसएस कार्यकर्ता के खिलाफ दुष्कर्म के मामले को झूठा बता रहे थे।
उनका कहना था कि आरएसएस कार्यकर्ता इंद्रजीत को गलत फंसाया गया है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस अवसर पर सुभाष, सुंदर सिंह, कुलदीप यादव, मनीष गुप्ता, रामसिंह छाबड़ी, वरुण चौधरी, अरविंद यादव आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि इस मामले में रोहड़ाई थाना प्रभारी को लाइन हाजिर भी किया जा चुका है। प्रदर्शनकारी घर जा चुके उपायुक्त डॉ यश गर्ग को बुलाने की जिद पर अड़े रहे। बाद में वापस गेट पर पहुंचे डीसी ने ज्ञापन लेकर उन्हें शांत कराया।
कोट्स
गांव में झगड़े की सूचना मिलने के बाद गांदला पहुंचने के बाद दोनों पक्षों से बातचीत के दौरान झगड़ा हो गया था। हमने झगड़े को रोकने का पूरा प्रयास किया था। इंद्रजीत की ओर से लगाया गया आरोप निराधार है। मैंने किसी का कोई पक्ष नहीं लिया। - रामकुमार, तत्कालीन एसएचओ
मामला पहले से ही संज्ञान में है। पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराई जा रही है। कानूनन जो भी कार्रवाई होगी प्रशासन के द्वारा की जाएगी। - डॉ यश गर्ग, उपायुक्त रेवाड़ी