नगर परिषद के प्रॉपर्टी टैक्स को कंप्यूटरीकृत करने वाले ठेकेेदार ने ही बुधवार को नप अधिकारियों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा दिया। मामला ठेकेदार को दी गई पेमेंट पर टीडीएस काटने से जुड़ा हुआ है। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी नप के कई कर्मचारियों पर मामला दर्ज हो चुका है।
नप के प्रॉपर्टी टैक्स को कंप्यूटरीकृत करने का ठेका लेने वाले ठेकेेदार दिनेश भारद्वाज ने बताया कि निजी फर्म की ओर से फरवरी 2013 में नगर परिषद का प्रॉपर्टी टैक्स कंप्यूटरीकृत करने का काम किया गया था। वहीं पुलिस को मिली शिकायत में बताया गया है कि ठेकेदार दिनेश कुमार भारद्वाज द्वारा अगस्त 2013 में बिल भुगतान के लिए नगर परिषद में प्रस्तुत किया गया था। नियमानुसार बिल पर दो प्रतिशत टीडीएस 31 हजार 720 काटा गया था। इसके बाद मई 2014 में फर्म को दोबारा से काम दिया गया था। बिल भुगतान के समय नप द्वारा 21 हजार 524 रुपये का टीडीएस काटा गया था। नगर परिषद द्वारा बिलों पर टीडीएस तो काट लिया गया, परंतु आयकर विभाग में जमा नहीं कराया गया। यह राशि अभी नगर परिषद के खाते में जमा है तथा नप द्वारा ही इस राशि का प्रयोग किया जा रहा है। टीडीएस जमा नहीं कराने पर आयकर विभाग व ठेकेदार को नुकसान हुआ है, जबकि नगर परिषद को इसका लाभ मिला है।
वहीं, हाल ही में नगर परिषद में प्रॉपर्टी टैक्स का रिकार्ड न होने की खबर प्रकाशित हुई थी। कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि जब नप में हाउस टैक्स का रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं है तो फिर 2010 से 2015 तक का टैक्स कैसे मांगा जा रहा है। इस मामले में नगर परिषद ईओ डा. विजयपाल ने कहा कि ठेकेदार की की 50 हजार रुपये की राशि बाकी है। ठेकेदार से बात हो चुकी है एक सप्ताह में सभी रिकार्ड परिषद के पास होगा। लेकिन नगर परिषद की ओर से तो अभी तक बकाया राशि चुकता भी नहीं की थी कि उससे पहले ही ठेकेदार ने नगर परिषद अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी किए जाने का मामला दर्ज करा दिया है।