गुड़गांव स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार रात को कई घंटे तक चलाए ऑपरेशन में गिरोह के आठ लोगों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। 10वीं पास शातिर डॉक्टर का सिस्टम कुछ इस तरह था कि जरा सी भी चूक से पूरा गिरोह हाथ से निकल जाता। इसके लिए हर छह किलोमीटर पर लिंग जांच कराने आए पेशेंट की सवारी बदलना, रात में ही काम करना और अन्य निर्देशों का ध्यान रखा जाता था।
यही नहीं हजारों रुपये ऐंठने के बावजूद बेईमानी का धंधा ईमानदारी से नहीं होता था। महज टीवी, पिआनो, माइक और डीवीडी के बल पर मरीज को लिंग जांच का भरोसा देकर रुपये ऐंठ लिये जाते थे।
टीवी बनता मॉनिटर, पिआनो से चेकअप की निकलती थी आवाज
फर्जी डॉक्टर चरण सिंह इतना शातिर था कि लिंगजांच के लिए पेशेंट के साथ आने वाले लोगों को पहले ही कन्वेंस कर लेता था। इसके बाद महिला को जिस तरह बेवकूफ बनाया जाता था, वह तरीका भी गजब का था। खेत के बीच में बनी कोठड़ी में चरण सिंह ने पुराना टीवी सेट लगाया था, जिसे वह मॉनिटर दिखाता था। वहीं पास ही कपड़े व अन्य चीजों के बल पर पियानो और टीवी से अटैच्ड डीवीडी छिपाता था। पेशेंट आने पर कपड़े से ढके माइक को पेट के पास लगाता और धीरे से पिआनो के कुछ की-पेड बजाता। इससे बीप की आवाज आती, वहीं डीवीडी से टीवी स्क्रीन पर हल्की धुंधली छवि दिखती थी। इसके बाद चरण सिंह बताता कि लड़का है या लड़की।
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कोठड़ी में दवाइयों का लगा था अंबार
गांव की कोठड़ी को पूरे अल्ट्रासाउंड सेंटर का रूप देने के लिए दवाइयों का भी अंबार लगा रखा था। ड्रग कंट्रोलर अमनदीप चौहान ने बताया कि कोठड़ी से टीम को डेक्सोना की 200 टेबलेट मिली थीं। इन टेब्लेट्स को फैटल स्टेरॉयड के रूप में जाना जाता है। इन दवाइयों को रखने का कोई लाइसेंस भी आरोपी चरण सिंह के पास नहीं मिला है।
18 किलोमीटर पर बदलती थी तीन सवारी
चरण सिंह के गुर्गे शुरुआत में ही पेशेंट को किसी और जगह लिंग जांच कराने की बात कहते थे। जैसे इस मामले में पटौदी बताया गया। लेकिन कई रास्तों से घुमाकर खोल के गांव लाते थे। यहां आने से पहले भी मेन रोड पर फोन पर संपर्क करने वाला शख्स मिलता था। इसके बाद 18 किलोमीटर अंदर एप्रोच रोड पर कुछ दूरी पर साथ आने वाले शख्स को रुकवा दिया जाता था। इसके बाद दो या तीन बाइक से 6-6 किलोमीटर का रास्ता अलग-अलग शख्स तय कराते थे। इन बाइक सवारों को पेशेंट लाने ले जाने के एवज में एक-एक हजार रुपये मिलते थे।
बांसुरी से भी करो जांच, तो भी लगता है एक्ट
मामले को लेकर कई लोगों का कहना था कि फर्जी उपकरण मिलने पर पीसी-पीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई नहीं होनी चाहिये थी। लेकिन स्पष्ट कर दें कि अगर कोई शख्स बांसुरी या अन्य किसी वस्तु से भी चेक कर इस बात का दावा करता है कि गर्भ में बेटा है या बेटी, तो यह भी एक्ट के अंतर्गत आरोपी हैं। - अमनदीप चौहान, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर, गुड़गांव