सहकारिता विभाग से संबंधित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आइसीडीपी) विंग में केंद्र सरकार से मिली 22 करोड़ रुपये सहायता राशि की अधिकारियों व कर्मचारियों ने बंदरबांट कर ली। कई महीनों की जांच के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आइसीडीपी विंग की सहायक रजिस्ट्रार एवं महाप्रबंधक अनु कौशिक को इस मामले में गिरफ्तार किया है। उनके बैंक खाते से 1.30 करोड़ रुपये मिले हैं। फिलहाल एसीबी की टीम अनु कौशिक से पूछताछ कर रही है।
एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आइसीडीपी) विंग सहकारिता के क्षेत्र से जुड़ा है। इस विंग के द्वारा चयनित जिलों में कृषि, कृषि आधारित उद्योगों, कुटीर व घरेलू उद्योगों और मत्स्य, डेयरी व पशुधन, कृषि-संबंधित क्षेत्रों में सहकारी समितियों के माध्यम से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है।
मुख्य तौर पर यह विंग केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित करता है। पैक्स सोसाइटियों में गोदाम बनाना भी इसी विंग का काम है। वर्ष 2018 से 2022 तक आइसीडीपी विंग के पास केंद्र सरकार से रेवाड़ी जिले के लिए 22 करोड़ रुपये सहायता राशि आई थी।
इस दौरान अनु कौशिक अंबाला में सहकारिता विभाग में सहायक रजिस्ट्रार पद पर तैनात थीं। उनके पास रेवाड़ी जिले के आइसीडीपी विंग के महाप्रबंधक का भी चार्ज था। चार साल में इस सहायता राशि का कहीं इस्तेमाल नहीं किया गया। अनु और स्टाफ के कई अन्य सदस्यों ने सरकारी राशि का गबन कर लिया।
एक नेता के सीए के बेटे का नाम भी आया
आइसीडीपी विंग में पैसा सिर्फ रजिस्ट्रार तक ही नहीं रहा, विंग के अन्य कर्मचारियों तक भी पहुंचने की आशंका है। अनु कौशिक के जेल जाने के बाद अब अन्य कर्मचारियों की भी शीघ्र गिरफ्तारी हो सकती है। एक राजनेता के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के बेटे का नाम भी इस पूरे गोलमाल में सामने आ रहा है।
सहकारिता मंत्री ने दिए थे जांच के आदेश
रेवाड़ी सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारीलाल का गृह जिला है। करीब आठ-दस माह पहले रेवाड़ी के राव इंद्रजीत मंच के प्रवीण बॉबी ने अनु कौशिक और अन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद सहकारिता मंत्री ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए।