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बिजली चोरी: निगम को हर माह 12 करोड़ का फटका

Thu, 16 Feb 2017 12:49 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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बिजली - फोटो : अमर उजाला
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जिले में बिजली चोरी से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को हर महीने करीब 12 करोड़ का फटका लग रहा है। लाइन लॉस को जोड़कर कोसली डिवीजन में निगम को सर्वाधिक 43.31 फीसदी, रेवाड़ी में 17.80 फीसदी और धारूहेड़ा डिवीजन में सबसे कम 13.88 फीसदी नुकसान होता है।
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निगम की तरफ से प्रत्येक महीने औसतन 16 करोड़ दो लाख 72 हजार 660 बिजली यूनिट सप्लाई की जाती है। इसमें से केवल 12 करोड़ 66 लाख 32 हजार 938 यूनिट का ही बिल जमा हो पाता है। ऐसे में निगम की तीन करोड़ 36 लाख 39 हजार 723 यूनिट का हर महीने लोस हो रहा है। जिले में घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को मिलाकर कुल एक लाख 87 हजार 237 उपभोक्ता हैं।

निगम को हो रहा नुकसान
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के रेवाड़ी सर्कल में रेवाड़ी, कोसली और धारूहेड़ा सहित तीन डिवीजन हैं। रेवाड़ी भी सिटी-1, सिटी-2 और सब अर्बन में बंटा हुआ है। निगम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रेवाड़ी डिवीजन में प्रत्येक महीने औसतन दो करोड़ 55 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसमें से करीब एक करोड़ 88 लाख बिजली यूनिट का बिल जमा होता है। इस हिसाब से यदि रेवाड़ी सर्कल के नुकसान को देखा जाए तो बिजली चोरी पर लगाम लगने से रेवाड़ी डिवीजन को एक महीने तक फ्री में बिजली मिल सकती है। निगम 16 फीसदी टेक्निकल लाइन लोस मानकर चलता है।
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हर महीने निगम को मिलते हैं 70 करोड़ रुपये
जिले में बिजली सप्लाई से निगम को हर महीने करीब 70 करोड़ रुपये बिजली बिलों के जमा होने से मिलते हैं। टेक्निकल लाइन लोस को घटाकर यदि 12 करोड़ की बिजली चोरी पर रोक लग जाए तो निगम का 82 करोड़ रुपये हर महीने मिल सकते हैं। निगम के अनुसार हरियाणा में हर दिन करीब 5 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है। अर्थात एक महीने में 150 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो जाती है। निगम ने जिले में चौबीस घंटे बिजली सप्लाई देने के उद्देश्य से चोरी पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के तहत जनवरी में जहां 80.7 लाख रुपये की चोरी पकड़ी गई थी। वहीं 14 फरवरी तक 75 लाख रुपये की चोरी के मामले भी पकड़े जा चुके हैं।

यूं समझें लोस का गणित
निगम की तरफ से कुल तीन करोड़ 36 लाख 39 हजार 723 यूनिट का अंतर आता है। यह फीडर से चलकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने वाली बिजली है। इसमें करीब एक करोड़ 36 लाख से अधिक यूनिट लाइन लोस में चली जाती है। वहीं बची हुई करीब दो करोड़ यूनिट चोरी हो जाती है। निगम की ओर से विभिन्न मदों में दी गई यूनिट औसत छह रुपये प्रति यूनिट मानी जाती है। ऐसे में दो करोड़ यूनिट का छह रुपये के हिसाब से बिल 12 करोड़ रुपये बनता है। निगम के एसई राजकुमार जाजौरिया के अनुसार बिजली चोरी का बारह करोड़ भी औसत लिया गया है। समय-समय पर यह भी घटता बढ़ता रहता है।
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कोट
बिजली चोरों के खिलाफ निगम ने विशेष अभियान शुरू कर दिया है। हमारा मकसद जिले के लोगों को चौबीस घंटे उपलब्ध कराना है। वह तभी संभव हो पाएगा जब चोरी पर लगाम लगेगी। फरवरी में चोरी पर रोक लगाने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। वैसे जिले में हर माह करीब 12 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो जाती है।   राजकुमार जाजौरिया, एसई, डीएचबीवीएन, रेवाड़ी सर्कल
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